नईदुनिया प्रतिनिधि, शहडोल। सावन का सोमवार और हर-हर महादेव के जयकारे। हाथों में बेलपत्र, जल और भगवान शिव के दर्शन के लिए उमड़ती भीड़। शहडोल के सोहागपुर स्थित विराट मंदिर में 17 अगस्त को तीसरे सावन सोमवार पर आस्था का यही दृश्य देखने को मिला।
अन्य शिव मंदिरों में भी सुबह से ही शिवभक्तों का तांता लगा रहा। विराट मंदिर मेला मैदान से काबड़ यात्रा निकाली गई, जिससे भक्तों का सैलाब उमड़ा और अधिकांश भक्तों ने गर्भगृह तक पहुंचकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की।
सावन के दूसरे सोमवार के पहले गर्भगृह का ताला खोल दिया गया है, जिसके बाद से यहां आस्था की भीड़ बढ़ गई है। विराट मंदिर की पहचान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। यह लगभग 1000 साल पुराना मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और सूर्य विज्ञान के लिए भी प्रसिद्ध है।

मंदिर में वास्तु की मान्यता
- मान्यता है कि मंदिर के निर्माण में वास्तु और सूर्य की दिशा का विशेष ध्यान रखा गया था।
- सूर्योदय के समय सूर्य की पहली किरण सीधे गर्भगृह में विराजमान शिवलिंग पर पड़ती थी।
- मानो सूर्यदेव स्वयं भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हों।
- उस युग में जब आधुनिक तकनीक नहीं थी, दिशा, प्रकाश और सूर्य की गति का इतना सूक्ष्म गणित रखना स्थापत्य कौशल का अद्भुत उदाहरण है।
- यही बात इस मंदिर को रहस्यमय और आकर्षक बनाती है।
कलचुरी राजा ने शासनकाल में हुआ था निर्माण
पुरातत्व विभाग के अनुसार, विराट मंदिर का निर्माण कलचुरी राजा युवराज देव के शासनकाल में 950 से 1050 ईस्वी के बीच हुआ माना जाता है। यह लगभग 70 फीट ऊंचा मंदिर कलचुरी स्थापत्य क पहचान है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर पत्थरों में उकेरी गई शिव-पार्वती, गणेश, विष्णु, नृसिंह, सरस्वती, अर्धनारीश्वर, भैरव सहित अनेक देवी-देवताओं की प्रतिमाएं आज भी इसकी समृद्ध कला की कहानी कहती हैं।
महाभारत काल से है संबंध
विराट मंदिर की कहानी केवल कलचुरी काल से शुरू नहीं होती। इस स्थान को महाभारत काल के पांडवों और राजा विराट से जोड़ने वाली लोकमान्यता भी सदियों से चली आ रही है। वर्तमान संरचना कलचुरी काल की मानी जाती है, जबकि पांडवों से इसका संबंध धार्मिक आस्था और लोकस्मृति से जुड़ा है।
नए सवाल, नई कहानियां
सावन सोमवार को जब श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करते हैं, तब शायद बहुत कम लोग यह सोचते हैं कि जिस शिवलिंग पर आज जल चढ़ रहा है, उसी पर कभी वास्तु योजना के अनुसार सूर्य की पहली किरणें पड़ती रही होंगी। विराट मंदिर सिर्फ एक मंदिर नहीं है। यह शहडोल के इतिहास, आस्था, स्थापत्य और लोकविश्वास का ऐसा संगम है, जिसे जितना देखा जाए, उतने ही नए सवाल और नई कहानियां सामने आती हैं।