धर्म डेस्क, नई दिल्ली। “अरे! चौखट पर मत बैठो, अपशकुन होता है…” बचपन में अपनी दादी-नानी या घर के बड़े-बुजुर्गों से यह डांट हम सबने कभी न कभी जरूर सुनी होगी। सनातन धर्म में ऐसी कई दैनिक आदतें और मान्यताएं प्रचलित हैं, जिन्हें लेकर अक्सर हमें टोका जाता है। घर की चौखट यानी दहलीज पर बैठना या पैर रखना भी इन्हीं में से एक है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बुजुर्गों के इस सख्त लहजे के पीछे की असल वजह क्या थी? क्या यह महज एक अंधविश्वास है या फिर इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और पौराणिक रहस्य छिपा है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं…
सिर्फ लकड़ी का ढांचा नहीं, घर का सुरक्षा कवच है चौखट
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, हमारे घर की चौखट सिर्फ ईंट, पत्थर या लकड़ी से बना कोई साधारण ढांचा नहीं होती। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में इसे घर की मर्यादा, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा की एक बेहद पवित्र सीमा माना गया है। यह एक ऐसी ‘लक्ष्मण रेखा’ है, जो बाहरी दुनिया की नकारात्मक ऊर्जा और बीमारियों को घर के भीतर आने से रोकती है।
मां लक्ष्मी के आगमन में बाधा और राहु का प्रभाव
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से सुख, समृद्धि और धन की देवी मां लक्ष्मी का आगमन होता है। यदि कोई व्यक्ति मुख्य दहलीज पर बैठता है, तो वह अनजाने में मां लक्ष्मी के प्रवेश मार्ग में रुकावट बनता है, जिससे घर की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से चौखट का संबंध क्रूर ग्रह ‘राहु’ से माना जाता है। दहलीज पर पैर रखकर खड़े होने या वहां बैठने से कुंडली में राहु के नकारात्मक प्रभाव सक्रिय हो जाते हैं, जो परिवार में बेवजह का मानसिक तनाव, कलह और अचानक आने वाली परेशानियों का कारण बन सकते हैं।
भगवान नरसिंह और हिरण्यकश्यप वध का पौराणिक रहस्य
इस नियम के पीछे ‘विष्णु पुराण’ की एक बेहद शक्तिशाली और प्रसिद्ध कथा जुड़ी हुई है। दैत्यराज हिरण्यकश्यप को वरदान था कि उसकी मृत्यु न घर के अंदर होगी और न बाहर, न अस्त्र से होगी न शस्त्र से। तब भगवान विष्णु ने ‘नरसिंह अवतार’ (आधा मनुष्य, आधा सिंह) धारण कर हिरण्यकश्यप को ठीक घर की ‘चौखट’ पर अपनी जांघों पर रखकर अपने नाखूनों से उसका वध किया था।
चूंकि चौखट न तो घर के अंदर का हिस्सा है और न बाहर का, इसे एक ‘संधि स्थल’ माना जाता है। इस स्थान पर अत्यधिक उग्र और विनाशी ऊर्जा का वास होता है, यही वजह है कि शास्त्रों में यहाँ बैठने या समय बिताने की सख्त मनाही है।
दहलीज पर भोजन करना यानी दरिद्रता को आमंत्रण
शास्त्रों और पुराणों में यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि घर की चौखट पर बैठकर कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। दहलीज पर बैठकर खाना खाने से अन्न का अनादर होता है और इसे सीधे तौर पर दरिद्रता (गरीबी) को बुलावा देने वाला काम माना गया है।







