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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी मां राजमाता विजयाराजे सिंधिया सिंधिया की जयंती पर उनसे मिली एक ऐसी सीख को फिर से स्मरण किया है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने इस संबंध में एक्स के माध्यम से कहा कि आज मेरी पूज्य माताजी राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती पर उनसे मिली एक ऐसी सीख को फिर से स्मरण कर रही हूँ, जो आज भी मेरे विचारों और कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि मुझे याद है, हम घंटों की यात्रा करके अपने कार्यकर्ताओं के घरों तक पहुँचते थे। रात के एक बजे भी पहुँचते, तो हमारा स्वागत पूरे उत्साह और आत्मीयता से होता। हम उनके परिवारों, पड़ोसियों और मित्रों से मिलते, उनसे बातचीत करते और विचारधारा, संगठन तथा जनसेवा से जुड़े विषयों पर चर्चा करते। इन मुलाकातों में केवल राजनीतिक संवाद नहीं, बल्कि दिलों का जुड़ाव बनता था।
राजे ने कहा कि कार्यकर्ता से हमारा जुड़ाव ही हमारी विचारधारा, रणनीति और संगठन की प्रगति का मूल आधार होना चाहिए। जनसेवा का वास्तविक अर्थ भी इसी आत्मीयता और विश्वास में निहित है। राजनीति में भीड़ का आकार नहीं, बल्कि रिश्तों की गहराई मायने रखती है। भीड़ जुटाई जा सकती है, लेकिन विश्वास निरंतर सेवा, समर्पण और अपनेपन से ही अर्जित होता है।
संगठन की असली मजबूती कार्यकर्ताओं के साथ हमारे रिश्तों और जनता के विश्वास में है
उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता संगठन की शक्ति ही नहीं, उसकी आत्मा भी है। अम्मा महाराज से मिली यह सीख सदैव मेरा मार्गदर्शन करती रहेगी कि संगठन की असली मजबूती संख्या में नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं के साथ हमारे रिश्तों और जनता के विश्वास में है।
PC: aajtak.
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