जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर से पीएम नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया है। कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को पूर्व सांसद अश्क अली टांक की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के पश्चात मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बड़ा बयान दिया है। इस संबंध उन्होंने एक्स के माध्यम से भी कहा कि आज स्थिति यह है कि देश में जम्हूरियत ही खतरे में है।
चुनाव आयोग हो या न्यायपालिका, सभी संवैधानिक संस्थाएं और जांच एजेंसियां भारी दबाव में काम कर रही हैं। आज सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने 'फॉर्म 6' को कभी एंडोर्स (समर्थन) नहीं किया। चुनाव आयोग जो झूठे दावे कर रहा था, उसकी पोल अब खुल चुकी है। सत्ता में बैठे मोदी जी और अमित शाह जी मीडिया के सहयोग से जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता अत्यंत गंभीर है।
अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा के मुख्यमंत्री, अध्यक्ष और केंद्र में इनके प्रवक्ता बयानबाज़ी कर रहे हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि यदि देश में 12-13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए जाएं, तो उन पर क्या बीतती है? मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। जो लोग 15, 20 या 25 वर्षों से लगातार वोट दे रहे हैं, उनके नाम अचानक कैसे हटाए जा सकते हैं?
अब जब पोल खुल गई है, तो सरकार में घबराहट साफ दिखाई दे रही है
पूर्व सीएम गहलोत ने इस संबंध में आगे कहा कि एसआईआर का जो तरीका अपनाया गया है, उसमें यदि निष्पक्षता होती तो सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी। यदि वे बताते कि मृत या फर्जी मतदाताओं के नाम हटाकर वोटर लिस्ट को दुरुस्त करना है, तो किसी को आपत्ति नहीं होती, परंतु स्थिति यह है कि भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सहकर्मी खुद कह रहे हैं कि उन्होंने 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं और कैबिनेट सचिव तक को पत्र लिखा। अब जब पोल खुल गई है, तो सरकार में घबराहट साफ दिखाई दे रही है।
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