इंटरनेट डेस्क। होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। इसके तहत भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाई जाने की योजना पर काम किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद इस बात पर मुहर लगाई है।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की ओर से ओमान-यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा गया है। मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन के तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है।
आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात की थी। खबरों के अनुसार, सरकार की ओर से अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू किया गया है। इस संबंध में सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। इसमें गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत और सुरक्षा समेत दूसरे पहलुओं की जांच की जाएगी।
इस कारण उठाया जा रहा है ये कदम
गौरतलब है कि भारत की ओर से अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात किया जाता है। होर्मुज में तनाव के बीच भारत को कच्चे तेल के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब भारत ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करने का उत्सुक है।
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