Surya Grahan 2026: 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर खग्रास सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2026) और 28 अगस्त को रक्षाबंधन यानी श्रावणी पूर्णिमा पर खंडग्रास …और पढ़ें
Publish Date: Mon, 20 Jul 2026 12:59:39 PM (IST)Updated Date: Mon, 20 Jul 2026 01:09:08 PM (IST)
HighLights
- यह तभी संभव है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा ग्रहण बिंदुओं के पास हों
- राहत की बात यह है कि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे
- इसलिए भारत में इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा
नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। श्रावण में इस वर्ष एक ही पक्ष में दो ग्रहण की दुर्लभ खगोलीय घटना का संयोग बनने जा रहा है। 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या पर खग्रास सूर्य ग्रहण और 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा (रक्षाबंधन) पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण होगा।
एक ही पक्ष (पखवाड़े) में सूर्य और चंद्र ग्रहण का होना खगोल विज्ञान की दृष्टि से विशेष घटना है, लेकिन राहत की बात यह है कि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। इसलिए इनका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और श्रद्धालु हरियाली अमावस्या तथा रक्षाबंधन के पर्व पूरे धार्मिक उत्साह और विधि-विधान से मना सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला ने बताया धर्मशास्त्रों के अनुसार ग्रहण का सूतक तभी माना जाता है, जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दृश्य हो। चूंकि दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए मंदिरों के पट बंद करने, पूजा-अर्चना रोकने या धार्मिक अनुष्ठानों में किसी प्रकार का परिवर्तन करने की आवश्यकता नहीं होगी। महाकाल की नगरी उज्जैन सहित पूरे देश में पर्व सामान्य रूप से मनाए जाएंगे।
खगोल विज्ञान की दृष्टि से है विशेष
खगोलविदों के अनुसार सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जबकि चंद्र ग्रहण तब होता है, जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। एक ही पखवाड़े में अमावस्या पर सूर्य ग्रहण और पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होना एक स्वाभाविक लेकिन अपेक्षाकृत दुर्लभ खगोलीय क्रम है, क्योंकि यह तभी संभव होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा ग्रहण बिंदुओं (लूनर नोड्स) के निकट हो।
बिना किसी बाधा के मनाएं पर्व त्यौहार
दक्षिण भारतीय विद्वान ब्रह्मश्री चिलकमर्ति प्रभाकर चक्रवर्ती शर्मा ने बताया भारत में अदृश्य ग्रहण का धार्मिक कर्मकांडों पर प्रभाव नहीं माना जाता। इसलिए हरियाली अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण, वृक्षारोपण और शिव पूजा सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से होंगे।
इसी तरह रक्षाबंधन पर राखी बांधने, श्रावणी उपाकर्म, यज्ञोपवीत संस्कार और पूर्णिमा पूजन भी बिना किसी बाधा के संपन्न होंगे। इसलिए इंटरनेट माध्यमों पर चल रही किसी भी ग्रहण संबंधी जानकारियों पर ध्यान नहीं देते हुए, शास्त्र सम्मत निर्णय पर अमल करें।







