सनातन धर्म में घर का मंदिर सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का केंद्र है, जहां नियमित पूजा से सुख-शांति आती है। लोग श्रद्धापूर्वक देवी-देवताओं की मूर्तियां …और पढ़ें
Publish Date: Tue, 19 May 2026 02:30:45 PM (IST)Updated Date: Tue, 19 May 2026 02:30:45 PM (IST)
HighLights
- दो मूर्तियां रखने से लग सकता है दोष
- सकारात्मक ऊर्जा में होता है टकराव
- वास्तु दोष का बन सकता है कारण
धर्म डेस्क। सनातन धर्म में घर के मंदिर को बेहद पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि नियमित पूजा-पाठ से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
ऐसे में लोग श्रद्धा भाव से अपने घर के मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें स्थापित करते हैं। हालांकि वास्तु शास्त्र में मंदिर से जुड़े कुछ खास नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी माना जाता है।
एक ही भगवान की दो मूर्तियां रखने से क्यों बचना चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मंदिर में एक ही भगवान की एक से अधिक मूर्तियां रखना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसा करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता और घर में नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा में होता है टकराव
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा के दौरान मूर्तियों के आसपास सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। यदि मंदिर में एक ही देवता की दो मूर्तियां रखी जाती हैं, तो उनकी ऊर्जा आपस में टकराने लगती है। इससे घर का वातावरण प्रभावित हो सकता है और परिवार में तनाव या अशांति बढ़ सकती है।
पूजा में भटक सकता है ध्यान
पूजा-अर्चना का मुख्य उद्देश्य ईश्वर के एक स्वरूप पर ध्यान केंद्रित करना माना जाता है। लेकिन जब मंदिर में एक ही भगवान की कई मूर्तियां होती हैं, तो साधक का ध्यान भटक सकता है। इसकी वजह से मानसिक शांति और पूजा का पूरा लाभ प्राप्त नहीं हो पाता।
वास्तु दोष का बन सकता है कारण
वास्तु शास्त्र में खासतौर पर Lord Ganesha और शिवलिंग की एक से अधिक मूर्तियां रखने से बचने की सलाह दी गई है। मान्यता है कि इससे वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है, जो आर्थिक परेशानी, धन हानि और गृह क्लेश का कारण बन सकता है।
आमने-सामने न रखें मूर्तियां
ऐसा भी माना जाता है कि मंदिर में दो मूर्तियों को आमने-सामने रखना उचित नहीं होता। वास्तु के अनुसार इससे ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है और घर की बरकत प्रभावित हो सकती है।
नोट – यह लेख धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है। नईदुनिया इसकी पुष्टि नहीं करता। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।







