नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : दीपावली से पहले 1 नवंबर को रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार रविवार को पुष्य नक्षत्र होने से यह रवि पुष्य नक्षत्र कहलाएगा। ज्योतिषियों के अनुसार रवि पुष्य नक्षत्र में धार्मिक अनुष्ठान, प्रतिष्ठान का शुभारंभ और नवीन वस्तुओं की खरीदी विशेष मानी जाती है।
खास तौर पर इस दिन सोना-चांदी, भूमि, भवन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद की खरीदी स्थाई समृद्धि प्रदान करती है। इस दिन बही खाते, देवी देवताओं की मूर्तियां, धार्मिक पुस्तकें, राशि रत्न खरीदना भी विशेष शुभ व उन्नति प्रदान करने वाला माना गया है।
पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि तथा उप स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला ने बताया ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों को प्रधानता दी गई है। इनमें पुष्य को नक्षत्रों का राजा कहा गया है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि तथा उप स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। इन दोनों ही ग्रहों के संरक्षण में इस ग्रह को विशेष ऊर्जा मिलती है।
इस बार पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन आ रहा है
यही कारण है कि इस नक्षत्र की साक्षी में धार्मिक व भौतिक सुख, सुविधाओं की वस्तुएं तथा संपत्ति खरीदने का महत्व बताया है। इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक कार्य अक्षय पुण्य तथा खरीदी गई वस्तु स्थायी समृद्धि प्रदान करती है। इस बार पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन आ रहा है।
रविवार का अधिपति सूर्य है, जबकि सप्तमी तिथि भी सूर्य को समर्पित मानी जाती है। इस प्रकार सूर्य, शनि और बृहस्पति से जुड़ा यह संयोग विशेष महत्व रखता है। वर्तमान में शनि का गोचर बृहस्पति की राशि मीन में होने से भी ज्योतिषीय दृष्टि से इसका महत्व और बढ़ गया है।
दीपावली की तैयारियों को मिलेगी रफ्तार
कार्तिक मास में दीपावली से पहले आने वाले पुष्य नक्षत्र का व्यापारिक दृष्टि से विशेष महत्व है। परंपरागत व्यापारी इस अवसर पर नए बही-खाते, कलम और दवात खरीदते हैं। वहीं श्रद्धालु सोने-चांदी तथा तांबे के सिक्के, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं, पूजन यंत्र और अन्य धार्मिक सामग्री खरीदते हैं। इस बार सराफा, वाहन, इलेक्ट्रानिक और रीयल स्टेट के कारोबार में अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है। इससे सुस्त पड़े बाजार को रफ्तार मिलेगी।
पुष्य नक्षत्र के दिन खरीदी के शुभ मुहूर्त
- लाभ : सुबह 9.00 से 10.30 बजे तक
- अमृत : सुबह 10.30 से दोपहर 12.00 बजे तक
- शुभ : दोपहर 1.30 से दोपहर 3.00 बजे तक
- शुभ : शाम 5.48 से शाम 7.24 बजे तक
- अमृत : शाम 7.30 से रात 9.00 बजे तक
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