नागपंचमी पूजा श्रावण शुक्ल पंचमी को की जाती है। पंचमी तिथि का आरंभ 28 जुलाई की रात्रि 11 बजकर 24 मिनट से होगा। वहीं 30 जुलाई को रात्रि 12 बजकर 46 मिनट पर पंचमी तिथि समाप्त होगी। यानि उदयातिथि में पंचमी 29 जुलाई को रहेगी। इसलिए 29 जुलाई को ही नागपंचमी का त्योहार मनाया जाएगा।
By Navodit Saktawat
Publish Date: Sat, 26 Jul 2025 09:25:56 PM (IST)
Updated Date: Sat, 26 Jul 2025 09:35:32 PM (IST)
HighLights
- सुबह स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।
- फिर गाय के गोबर की मदद से आपको नाग बनाना चाहिए।
- इसके बाद नाग देवता का आह्वान आपको करना चाहिए।
धर्म डेस्क। नाग पंचमी का त्योहार श्रावण माह में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। ज्योतिष डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष और सर्पदंश के भय से मुक्ति मिलती है।हिंदू धर्म में मान्यता रखने वाले लोग इस दिन नाग देवता को स्नान करवाते हैं और उन्हें दूध पिलाते हैं। साल 2025 में जुलाई के महीने में नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। हालांकि, इसकी तारीख को लेकर कई लोगों के मन में संशय है।

नागपंचमी पूजा श्रावण शुक्ल पंचमी को की जाती है। पंचमी तिथि का आरंभ 28 जुलाई की रात्रि 11 बजकर 24 मिनट से होगा। वहीं 30 जुलाई को रात्रि 12 बजकर 46 मिनट पर पंचमी तिथि समाप्त होगी। यानि उदयातिथि में पंचमी 29 जुलाई को रहेगी। इसलिए 29 जुलाई को ही नागपंचमी का त्योहार मनाया जाएगा। नाग पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 41 मिनट से 8 बजकर 23 मिनट तक रहेगा
नाग पंचमी के दिन आपको सुबह स्नान-ध्यान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद गाय के गोबर की मदद से आपको नाग बनाना चाहिए। इसके बाद नाग देवता का आह्वान आपको करना चाहिए। अगर व्रत लेना चाहते हैं तो व्रत का संकल्प भी आपको इसी दौरान लेना चाहिए। इसके बाद नाग देवता पर मेवा, गुलाल, अबीर, मेहंदी आदि अर्पित करनी चाहिए। नाग देवता की पूजा के दौरान नीचे दिए गए मंत्र का जप आपको करना चाहिए
नाग पंचमी का महत्व
नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष से आपको मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भय, रोग और जीवन में आने वाली बाधाएं भी नाग देवता की पूजा से दूर होते हैं। नाग देवता को आध्यात्मिकता से भी जोड़कर देखा जाता है इसलिए अध्यात्म के क्षेत्र में भी नाग देवता की पूजा से उन्नति मिलती है।







