नई दुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन : पंचांग की गणना के अनुसार 17 अगस्त को रवि और शुभ योग के संयोग में नागपंचमी मनाई जाएगी। घरों में कुल परंपरा अनुसार नाग देवता का पूजन होगा। इस दिन सूर्य भी राशि परिवर्तन करेंगे। साथ ही अगस्त के तारे का भी उदय होगा। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार महापर्व के दृष्टिकोण से यह सभी स्थितियां बेहद शुभ है।
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डब्बावाला ने बताया पंचांग गणना के अनुसार सोमवार को पंचमी तिथि, चित्रा नक्षत्र, शुभ योग, बालव करण और कन्या राशि के चंद्रमा की साक्षी में नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन सवारी भी निकलेगी। नाग दोष की शांति के लिए नागपंचमी विशेष मानी जाती है।
इस दिन रवि योग का होना अनुष्ठान की सफलता और भक्त को उसका पूर्ण फल मिलने की दृष्टि से अत्यंत शुभ है। जन्म कुंडली में नाग दोष, राहु-केतु की विपरीत स्थिति अथवा ग्रहण दोष होने पर इस दिन पूजन कराना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नाग पूजन से कार्यों में आ रही बाधाओं का निवारण, मानसिक शांति और अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है।
दीवारों पर चित्र बनाकर नाग पूजा की परंपरा
मालवा और राजस्थान के मेवाड़-मारवाड़ क्षेत्र में नागपंचमी पर दीवारों पर नाग देवता के परिवार का चित्र बनाकर पूजन करने की परंपरा आज भी प्रचलित है। इसमें नाग-नागिन के जोड़े के साथ श्रावण की उपस्थिति का चित्रांकन किया जाता है। इसे कई परिवारों में कुल परंपरा का हिस्सा माना जाता है।
नाग की बांबी और मिट्टी के नाग का पूजन
धर्मशास्त्रीय मान्यता के अनुसार नागपंचमी पर नाग की बांबी का पूजन तथा मिट्टी के नाग बनाकर पंचोपचार विधि से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इससे परिवार से जुड़े ज्ञात-अज्ञात नाग दोष की शांति होती है।
राहु-केतु की अनुकूलता के लिए पूजा
जन्म कुंडली में राहु-केतु की प्रतिकूल स्थिति, ग्रहण योग अथवा इन ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा चल रही हो तो नाग पंचमी पर विधि-विधान से नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है।
उज्जैन में नाग तीर्थ की विशेष मान्यता
स्कंद पुराण के अवंति खंड में नाग तीर्थ और भैरव तीर्थ का उल्लेख मिलता है। उज्जैन में नाग देवता से जुड़े कई प्राचीन पूजन स्थल माने जाते हैं। रामघाट पर गायत्री मंदिर की सीढ़ियों पर अंकित नाग देवता की शिला तथा धर्मशाला के समीप स्थित नाग देवता का मंदिर भी श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं। मान्यता है कि यहां पूजन से पारिवारिक सुख-शांति और दोषों की निवृत्ति होती है।
पंचमी पर सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश
इसी दिन सुबह करीब 8 बजे सूर्य कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से विभिन्न परिवर्तन माने जाते हैं। इसी दिन रात करीब 8 बजे अगस्त के तारे का उदय भी होगा।
एक साल बाद खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में नागपंचमी महापर्व के रूप में मनाई जाएगी। 16-17 अगस्त की मध्य रात्रि 12 बजे मंदिर के पट खुलेंगे। महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भगवान नागचंद्रेश्वर की पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद आम दर्शन का सिलसिला शुरू होगा जो 17 अगस्त की मध्य रात्रि 12 बजे तक अनवरत जारी रहेगाl बता दें वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलते हैं और पूजा अर्चना होती है। वर्षभर महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा मंदिर के द्वार पर प्रतीकात्मक पूजा की जाती है।
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