धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र के रूप में अपना पांचवां अवतार लिया था। वामन अवत …और पढ़ें
Publish Date: Mon, 13 Apr 2026 04:43:04 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Apr 2026 04:43:04 PM (IST)
HighLights
- 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा भगवान विष्णु के पांचवें अवतार का जन्मोत्सव
- राजा बलि के अहंकार को चूर कर भगवान ने देवताओं को दिलाया था स्वर्ग
- पीले वस्त्र पहनकर और सात्विक रहकर पूजा करने से मिलती है मानसिक शांति
धर्म डेस्क। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने माता अदिति और महर्षि कश्यप के पुत्र के रूप में अपना पांचवां अवतार लिया था। वामन अवतार भगवान विष्णु का पहला ऐसा रूप था जो मानव रूप (ब्रह्मचारी ब्राह्मण) में प्रकट हुआ था।
शुभ मुहूर्त और समय (Vaman Dwadashi 2026 Muhurat)
पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि का समय इस प्रकार रहेगा…
- द्वादशी तिथि प्रारंभ: 14 अप्रैल 2026, सुबह 01:08 बजे से।
- द्वादशी तिथि समाप्त: 15 अप्रैल 2026, रात 12:12 बजे तक।
- व्रत पारण समय: 15 अप्रैल को सुबह 05:56 से 08:30 के बीच।
पौराणिक कथा: जब भगवान ने तीन पग में नाप लिया ब्रह्मांड
असुर राज बलि ने अपनी कठोर तपस्या और शक्ति से स्वर्ग समेत तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया था। देवमाता अदिति की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण किया।

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- दान की मांग: भगवान वामन राजा बलि के यज्ञ में पहुंचे और उनसे केवल तीन पग भूमि दान में मांगी।
- विराट रूप: बलि के वचन देते ही भगवान ने अपना विशाल रूप धारण किया। एक पग में पृथ्वी और दूसरे में आकाश नाप लिया।
- बलि का समर्पण: तीसरे पग के लिए कोई स्थान न बचने पर राजा बलि ने अपना सिर भगवान के आगे झुका दिया। उनके इस निस्वार्थ समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें पाताल लोक का राजा बनाया और स्वयं उनके द्वारपाल बनना स्वीकार किया।
वामन द्वादशी पूजा विधि (Pujan Vidhi)
इस दिन की पूजा घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाती है…
- शुद्धिकरण: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के प्रिय पीले वस्त्र धारण करें।
- अभिषेक: भगवान वामन या विष्णु जी की प्रतिमा को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
- पूजन सामग्री: भगवान को पीले फूल, चंदन, अक्षत और मौसमी फल अर्पित करें।
- विशेष भोग: इस दिन दही और मिश्री का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- कथा व आरती: श्रद्धापूर्वक वामन अवतार की कथा का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से आरती करें।
दान का महत्व: ‘वामन’ रूप में दान का फल
वामन द्वादशी पर दान देने का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। इस दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को निम्नलिखित वस्तुओं का दान करना चाहिए…
- छाता और खड़ाऊं (जूते): चूंकि वामन देव इसी रूप में आए थे।
- अन्न और वस्त्र: भूखों को भोजन और गरीबों को पीले वस्त्र दान करें।
- वाणी की मधुरता: दान के साथ-साथ इस दिन क्रोध और कड़वे वचनों का त्याग कर सात्विक जीवन बिताने का संकल्प लें।
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