धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 28 अगस्त 2026 को देशभर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। वैसे तो यह त्यौहार सगे भाई-बहनों के अटूट प्यार का प्रतीक है, लेकिन मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से आस्था की एक बेहद अनोखी और दिल को छू लेने वाली तस्वीर सामने आती है। यहां महिलाएं किसी इंसान को नहीं, बल्कि भगवान हनुमान जी को अपना सगा भाई मानकर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती हैं।
350 साल पुराना खेड़ापति हनुमान मंदिर
खरगोन शहर के बुरहानपुर दरवाजा स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर करीब 350 साल से भी अधिक प्राचीन है। आमतौर पर कई मंदिरों में महिलाओं के पूजन को लेकर नियम सख्त होते हैं, लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां महिलाओं को सीधे गर्भगृह में जाकर हनुमान जी की पूजा करने, उन्हें प्रसाद चढ़ाने और स्पर्श करने की पूर्ण अनुमति है।
रक्षाबंधन के दिन शहर की बड़ी संख्या में महिलाएं पूजा की थाली, मिठाई, चुनरी और सुंदर राखियां लेकर मंदिर पहुंचती हैं। वे बजरंगबली को अपना रक्षक और भाई मानकर उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं।
भगवान नहीं, भाई मानने के पीछे का कारण
मंदिर के पुजारी राकेश ठक्कर के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में हनुमान जी के तीन स्वरूप (बाल, युवा और वृद्ध) माने गए हैं। इस मंदिर में बजरंगबली अपने युवा स्वरूप में विराजमान हैं। युवा स्वरूप होने के कारण यहां की महिलाएं हनुमान जी को केवल ईश्वर के रूप में ही नहीं, बल्कि एक स्नेही भाई के रूप में देखती हैं। महिलाओं का मानना है कि जिस तरह एक भाई अपनी बहन की हर मुसीबत में ढाल बनकर रक्षा करता है, ठीक उसी तरह संकटमोचन हनुमान जी भी जीवन की हर कठिनाई में उनके साथ खड़े रहते हैं।
तीन मुखी प्रतिमा और बाएं पैर के सिंदूर का महत्व
मंदिर में हनुमान जी की तीन मुखी प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे अपने पैरों के नीचे राक्षस को दबाए हुए दिखाई देते हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, हनुमान जी के बाएं पैर का सिंदूर माथे पर लगाने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। रक्षाबंधन के दिन महिलाएं राखी बांधने के बाद इस सिंदूर को अत्यंत पवित्र प्रसाद के रूप में अपने माथे पर लगाती हैं।







