धर्म डेस्क। सनातन धर्म में सूर्य देव की उपासना का विशेष पर्व ‘मेष संक्रांति’ इस वर्ष 14 अप्रैल को मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर अपने उच्च की राशि ‘मेष’ में प्रवेश करते हैं, तो इसे मेष संक्रांति कहा जाता है। यह दिन केवल खगोलीय घटना मात्र नहीं है, बल्कि सौर नववर्ष का प्रारंभ और खरमास जैसे अशुभ समय की समाप्ति का प्रतीक भी है।
यदि आप जीवन में मान-सम्मान, उत्तम स्वास्थ्य और करियर में नई ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं, तो इस दिन सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए नीचे दी गई विधि और उपायों को अपना सकते हैं।
ऐसे प्रसन्न होंगे सूर्य देवता
सूर्य देव को जल अर्पित करना एक विज्ञान भी है और अटूट श्रद्धा भी। मेष संक्रांति के दिन अर्घ्य देने के लिए इन चरणों का पालन करें:
- ब्रह्म मुहूर्त का जागरण: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। यदि संभव हो तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।
- वस्त्रों का चयन: इस दिन ऊर्जा के प्रतीक लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ होता है।
- तांबे के पात्र का प्रयोग: अर्घ्य के लिए हमेशा तांबे के लोटे का उपयोग करें। जल में कुमकुम, अक्षत (चावल), लाल फूल और थोड़े काले तिल डालना न भूलें।
- मंत्रों का शक्तिपुंज: हाथ सिर से ऊपर ले जाकर जल की पतली धारा गिराएं और उस धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें। अर्घ्य देते समय “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का निरंतर जप करें।
- विशेष सावधानी: ध्यान रखें कि अर्घ्य देते समय जल की बूंदें आपके पैरों पर न पड़ें। जल को किसी गमले या पात्र में अर्पित करना श्रेष्ठ है।
सत्तू संक्रांति का महत्व और विशेष कार्य
उत्तर भारत के कई हिस्सों में मेष संक्रांति को ‘सत्तू संक्रांति’ के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन कुछ विशेष कार्य आपके पुण्य में वृद्धि कर सकते हैं:
- पवित्र स्नान: नदियों में स्नान का फल अश्वमेध यज्ञ के समान माना गया है।
- घड़ा दान: गर्मी की शुरुआत का प्रतीक होने के कारण, किसी जरूरतमंद को मिट्टी का घड़ा (पानी से भरा हुआ) और गुड़ दान करना सौभाग्य लाता है।
- सत्तू का सेवन: इस दिन सत्तू खाना और दान करना आरोग्य प्रदान करता है।
- गौ सेवा: भीगी हुई चने की दाल और गुड़ गाय को खिलाने से कुंडली के पितृ दोष और सूर्य दोष शांत होते हैं।
सफलता के अचूक उपाय
यदि आप कार्यक्षेत्र में बाधाओं का सामना कर रहे हैं या आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, तो मेष संक्रांति के दिन ये पाठ जरूर करें:
- आदित्य हृदय स्तोत्र: रावण पर विजय पाने के लिए भगवान राम ने भी इसका पाठ किया था। यह स्तोत्र करियर में सफलता के बंद द्वार खोलता है।
- सूर्याष्टकम: जीवन की नकारात्मकता को दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए सूर्याष्टकम का पाठ फलदायी है।
क्यों खास है यह दिन?
मेष संक्रांति से सूर्य अपनी उच्चतम अवस्था में होते हैं, जिससे व्यक्ति की इच्छाशक्ति (Will Power) मजबूत होती है। 14 अप्रैल के बाद से ही विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे सभी रुके हुए शुभ व मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। श्रद्धा भाव से की गई सूर्य उपासना आपके जीवन को सूर्य की भांति दैदीप्यमान बना सकती है।
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