इस बार अभिषेक के लिए किसी प्रकार की स्लॉट बुकिंग नहीं रखी गई है। श्रद्धालु निर्धारित व्यवस्था के अनुसार भगवान अचलेश्वर महादेव के दर्शन और जलाभिषेक कर …और पढ़ें
Publish Date: Mon, 03 Aug 2026 08:13:18 AM (IST)Updated Date: Mon, 03 Aug 2026 08:14:24 AM (IST)
HighLights
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम, पुलिस के साथ 60 सेवादार रहेंगे तैनात
- पूजा विधि: पंचामृत अभिषेक और मंत्र जाप से प्रसन्न होंगे भगवान शिव
- धार्मिक महत्व: व्रत और जलाभिषेक से मिलती है सुख-समृद्धि
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भगवान शिव की आराधना के सबसे पवित्र माने जाने वाले सावन मास का पहला सोमवार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। शहर के प्राचीन अचलेश्वर महादेव मंदिर में सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने की संभावना है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार पहले सोमवार को 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन करने का अनुमान है। इसे देखते हुए मंदिर न्यास और जिला प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।
प्रमुख प्रवेश द्वार पर लगाएं गए हैं बैरीकेड्स
मंदिर के तीनों प्रमुख प्रवेश द्वार नंदी द्वार, त्रिशूल द्वार और एमएलबी कालेज गेट पर बैरीकेड्स लगाए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए हैं, ताकि दर्शन के दौरान धक्का-मुक्की या अव्यवस्था की स्थिति न बने। पुलिस बल के साथ 60 प्रशिक्षित सेवादार भी तैनात रहेंगे, जो श्रद्धालुओं को कतारबद्ध दर्शन कराने, मार्गदर्शन देने और आपात स्थिति में सहायता उपलब्ध कराने का कार्य करेंगे। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि गर्भगृह और पूरे मंदिर परिसर की विशेष साफ-सफाई की गई है। पूरे दिन सफाई व्यवस्था जारी रहेगी।
इस बार अभिषेक के लिए किसी प्रकार की स्लॉट बुकिंग नहीं रखी गई है। श्रद्धालु निर्धारित व्यवस्था के अनुसार भगवान अचलेश्वर महादेव के दर्शन और जलाभिषेक कर सकेंगे। उधर, शहर के गुप्तेश्वर महादेव, कोटेश्वर महादेव सहित अन्य प्रमुख शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। पार्किंग, यातायात और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, आक के पुष्प और मौसमी फल अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप, महामृत्युंजय मंत्र, शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। अंत में आरती कर परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण की प्रार्थना करें।
इन बातों का रखें ध्यान
- कतारबद्ध होकर ही दर्शन करें।
- प्रशासन द्वारा निर्धारित मार्ग का पालन करें।
- बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- प्लास्टिक और कचरा मंदिर परिसर में न फैलाएं।
- धक्का-मुक्की या अफवाहों से बचें।
- सुरक्षा कर्मियों और सेवादारों के निर्देशों का पालन करें।
सावन के सोमवार का धार्मिक महत्व
- धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार का संबंध भगवान शिव की विशेष कृपा से माना जाता है।
- इस दिन व्रत, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से मानसिक शांति, रोगों से मुक्ति, वैवाहिक जीवन में सुख, संतान की प्राप्ति और आर्थिक समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
- अविवाहित युवक-युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना से सोमवार का व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
- यही कारण है कि सावन का पहला सोमवार आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है।







