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हिंदू नववर्ष 2026: देवगुरु बृहस्पति होंगे राजा और मंगल मंत्री, ‘रौद्र’ संवत्सर लेकर आएगा मिश्रित फल, आपके जीवन पर क्या होगा असर?

हिंदू नववर्ष 2026: देवगुरु बृहस्पति होंगे राजा और मंगल मंत्री, ‘रौद्र’ संवत्सर लेकर आएगा मिश्रित फल, आपके जीवन पर क्या होगा असर?

हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा यानी 19 मार्च को गुरुवार के दिन चैत्र नवरात्र के साथ होगी। नव संवत्सर का नाम रौद्र रहेगा, जिसमे …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 18 Mar 2026 02:35:56 AM (IST)Updated Date: Wed, 18 Mar 2026 02:35:56 AM (IST)

19 मार्च से चैत्र नवरात्रि और नव संवत्सर का आगाज। (AI से जेनरेट की गई इमेज)

HighLights

  1. चैत्र नवरात्रि और नव संवत्सर का आगाज
  2. 72 साल बाद बना है ऐसा ‘त्रिवेणी योग’
  3. चाणक्यपुरी में बंधेगी 51 फीट ऊंची गुड़ी

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत चैत्र प्रतिपदा यानी 19 मार्च को गुरुवार के दिन चैत्र नवरात्र के साथ होगी। नव संवत्सर का नाम रौद्र रहेगा, जिसमें देव गुरु बृहस्पति राजा और मंगल मंत्री होंगे। नववर्ष की विशेषता यह है कि इसका आगमन शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि त्रिवेणी योग में हो रहा है। ज्योतिर्विदों के अनुसार यह संयोग 72 वर्ष में पहली बार बन रहा है। साथ ही यह वर्ष मिश्रित फल प्रदान करने वाला है।

ग्रहों की चाल और संवत्सर का भविष्यफल

ज्योतिर्विद शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार वर्ष की शुरुआत गुरुवार से हो रही है, इसलिए देव गुरु बृहस्पति को वर्ष का राजा माना जाएगा और मंत्री पद मंगल ग्रह को प्राप्त होगा। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, जबकि मंगल साहस और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। शास्त्रों के अनुसार रौद्र संवत्सर में बरसात कम होगी, आग लगने की घटनाएं होंगी, आपदाएं आएंगी और राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिलेगी।

हालांकि बृहस्पति के राजा होने से धर्म, शिक्षा और कृषि के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत भी हैं। इस संवत्सर की एक और विशेषता है कि अधिक मास पड़ने के कारण विक्रम संवत 2083 में सामान्य बारह की जगह तेरह महीने होंगे। ज्योतिर्विद विनायक त्रिवेदी के अनुसार संवत्सर का राजा बृहस्पति अपने शत्रु बुध की राशि में मौजूद होकर चतुर्थ भाव में बैठने से इस बात का संकेत है कि यह संवत्सर अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल लेकर आया है।

बड़ा गणपति पर सांस्कृतिक आयोजन और सूर्य अर्घ्य

पारंपरिक लोक नृत्य, वैदिक मंत्रोच्चार एवं शंख ध्वनि के साथ गुड़ी पड़वा पर नववर्ष का स्वागत सूर्य अर्घ्य देकर गुरुवार को सुबह 6:15 बजे मनाया जाएगा। संस्था सार्थक एवं हिंदू नववर्ष आयोजन समिति के तत्वावधान में बड़ा गणपति चौराहे पर आयोजन होगा। संस्था के प्रमुख एवं भाजपा प्रदेश के सह मीडिया प्रभारी दीपक जैन “टीनू” ने बताया कि इस मौके पर नृत्यांगना दमयंती भाटिया मिरदवाल कथक की प्रस्तुति देंगी। प्रस्तुति की शुरुआत गणेश वंदना से होगी। तत्पश्चात भगवान शिव का ताण्डव स्तोत्र पढ़ा जाएगा, जिसमें शिव की ऊर्जा और सृजनात्मक शक्ति को कथक के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाएगा। इसके पश्चात नृत्यांगनाएं मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी स्वरूप को मंच पर साकार करेंगी, जो शक्ति और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

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चाणक्यपुरी में बंधेगी प्रदेश की सबसे ऊंची 51 फीट की गुड़ी

संस्था विट्ठल रुक्मिणी द्वारा आयोजित होने वाला गुड़ी पड़वा उत्सव इस वर्ष अपने 23वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इस उपलक्ष्य में शहर के चाणक्यपुरी चौराहे पर प्रदेश की सबसे ऊंची 51 फीट की गुड़ी बांधी जाएगी, जो पूरे क्षेत्र के आकर्षण का केंद्र रहेगी। संस्था के मयूरेश पिंगले ने बताया कि आयोजन को दिव्यता प्रदान करने के लिए विशेष रूप से उज्जैन से आए उन कलाकारों को आमंत्रित किया गया है, जो बाबा महाकाल की सवारी में ढोल, मृदंग और शंखनाद करते हैं। सुबह 10 बजे जब 51 फीट की गुड़ी का पूजन कर उसे बांधा जाएगा, तब ढोल-नगाड़ों की थाप और शंखों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।

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