Hindu Nav Varsh: वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आगाज 19 मार्च, गुरुवार से होने जा रहा है। चैत्र माह …और पढ़ें
Publish Date: Sun, 04 Jan 2026 06:28:19 PM (IST)Updated Date: Sun, 04 Jan 2026 06:28:19 PM (IST)
HighLights
- 19 मार्च से ब्रह्मांड की सत्ता में बड़ा फेरबदल
- नाम के अनुरूप उग्र होगा ‘रौद्र’ होगा स्वभाव
- जानें आपके जीवन और देश पर क्या होगा असर
धर्म डेस्क। वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में हिन्दू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आगाज 19 मार्च, गुरुवार से होने जा रहा है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला ‘गुड़ी पड़वा’ इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होगा, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव ‘राम नवमी’ तक चलेगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, नव संवत्सर 2083 के शुरू होते ही ब्रह्मांडीय सत्ता और ग्रहों के मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा, जिसका सीधा प्रभाव जनजीवन और प्रकृति पर पड़ेगा।
रौद्र संवत्सर
इस नए साल का नाम ‘रौद्र संवत्सर’ होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रौद्र संवत्सर अपने नाम की तरह ही तीव्र और उग्र स्वभाव वाला माना जाता है। इसके प्रभाव से वायुमंडल और पर्यावरण में असंतुलन की स्थिति बन सकती है। आने वाले समय में कहीं भीषण गर्मी और लू का प्रकोप रहेगा, तो कहीं बेमौसम बरसात और आंधी-तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। भूगर्भीय हलचल और भूकंप की आशंका भी जताई जा रही है।
बृहस्पति होंगे ‘राजा’ और मंगल संभालेंगे ‘मंत्री’ पद
विक्रम संवत 2083 के मंत्रिमंडल में ग्रहों की स्थिति इस प्रकार रहेगी:
- राजा: देवताओं के गुरु बृहस्पति (देवगुरु राजा होने से ज्ञान और धर्म की वृद्धि होगी)।
- मंत्री: ऊर्जा और साहस के कारक मंगल (हिंसा और क्रोध में बढ़ोतरी की आशंका)।
- गृहमंत्री: मन के कारक चंद्रदेव (जनता की भावनाओं में उतार-चढ़ाव)।
- खाद्य मंत्री: ग्रहों के राजकुमार बुध (कृषि और उत्पादन में लाभ)।
सफलता और चुनौतियों का मिश्रण
राजा बृहस्पति होने के कारण देश में आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अकल्पनीय प्रगति होगी। विशेषकर कृषि और उत्पादन सेक्टर में रिकॉर्ड सफलता मिलने के योग हैं। हालांकि, मंगल के मंत्री होने से समाज में उग्रता, विवाद और रक्त संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। न्याय के देवता शनि की दृष्टि के कारण खनिज और तेल क्षेत्रों में कुछ प्रतिकूल प्रभाव दिख सकते हैं।
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आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
चंद्रमा की स्थिति एक सफल मानसून की ओर संकेत कर रही है, लेकिन बुध के प्रभाव से महंगाई में तेजी आ सकती है। सोना और चांदी (स्वर्ण-रजत) की कीमतों में भारी उछाल और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। सरकारी राजकोष में वृद्धि होगी, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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