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3 साल बाद आ रहा है सबसे खास दिन! 31 मई को मनाई जाएगी अधिक मास की पूर्णिमा, भूलकर भी न करें ये गलतियां

3 साल बाद आ रहा है सबसे खास दिन! 31 मई को मनाई जाएगी अधिक मास की पूर्णिमा, भूलकर भी न करें ये गलतियां

पूरे 3 साल बाद इस वर्ष अधिक मास (मलमास) का पावन आगमन हुआ है। इस विशेष महीने के अंतर्गत आने वाली ‘अधिक पूर्णिमा’ को बेहद दुर्लभ और फलदायी माना गया है। …और पढ़ें

Publish Date: Thu, 28 May 2026 05:24:34 PM (IST)Updated Date: Thu, 28 May 2026 05:24:34 PM (IST)

अधिक पूर्णिमा पर कुछ गलतियां कर सकती हैं नुकसान।

HighLights

  1. अधिक पूर्णिमा पर कुछ गलतियां कर सकती हैं नुकसान
  2. इस दिन भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है
  3. घर में क्लेश करने से रूठ सकती हैं माता लक्ष्मी

धर्म डेस्क। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पूरे 3 साल बाद इस वर्ष अधिक मास (मलमास) का पावन आगमन हुआ है। इस विशेष महीने के अंतर्गत आने वाली ‘अधिक पूर्णिमा’ को बेहद दुर्लभ और फलदायी माना गया है। वर्ष 2026 में यह पवित्र तिथि 31 मई को मनाई जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु (श्रीहरि) और धन की देवी माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दिन की गई कुछ छोटी गलतियां साधक को बड़े नुकसान में डाल सकती हैं। आइए जानते हैं अधिक पूर्णिमा पर किन कार्यों को करने से बचना चाहिए।

शुभ और मांगलिक कार्यों की पूर्ण मनाही

शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास को ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है। इस पूरे महीने और विशेषकर पूर्णिमा के दिन किसी भी नए व्यापार की शुरुआत, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई या विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है। यह समय भौतिक सुखों या सांसारिक कार्यों के लिए नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि, मंत्र जप और दान-पुण्य के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

घर में क्लेश करने से रूठ सकती हैं माता लक्ष्मी

  • धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जिस घर में अशांति, वाद-विवाद और अपशब्दों का प्रयोग होता है, वहां से माता लक्ष्मी दूरी बना लेती हैं।
  • अधिक पूर्णिमा के दिन घर के भीतर किसी भी प्रकार के झगड़े से बचना चाहिए।
  • विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, माता-पिता या किसी असहाय व्यक्ति का अपमान भूलकर भी न करें, अन्यथा भगवान विष्णु की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है।

देर तक सोने से छिपेगा भाग्य

मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अपने चरम पर होता है। इस ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए जातकों को सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए।

विशेष नोट – पूर्णिमा के दिन सूर्योदय के बाद देर तक सोने और दिन के समय शयन करने की मनाही है। ऐसा करने से शरीर में आलस्य बढ़ता है और व्यक्ति इस दुर्लभ दिन के आध्यात्मिक व मानसिक लाभ से वंचित रह जाता है।

दरवाजे पर आए याचक को खाली हाथ लौटाना पड़ेगा भारी

पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर किए गए दान का महत्व सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक होता है। यदि इस दिन आपके द्वार पर कोई जरूरतमंद, भिखारी या साधु-संत आता है, तो उसे डांटकर या खाली हाथ न लौटाएं। याचक का अपमान करने से पितृ दोष लग सकता है। अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज, वस्त्र, फल या जल का दान अवश्य करें।

इन नियमों का कड़ाई से करें पालन

वर्जित कार्य सही विकल्प / नियम
तामसिक भोजन व नशा: लहसुन, प्याज, मांस, मछली या मदिरा का सेवन सात्विक जीवन: पूरी तरह शुद्ध शाकाहारी भोजन और फलाहार करें।
स्वच्छता नियम: बाल कटवाना, शेविंग (दाढ़ी बनाना) और नाखून काटना शारीरिक शुद्धि: पूर्णिमा से पूर्व या बाद में ये कार्य करें, इस दिन इनसे बचें।
मानसिक विकार: क्रोध, ईर्ष्या और किसी की निंदा करना ईश्वर भक्ति: शांत मन से भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।

नोट – 31 मई 2026 को आने वाली यह अधिक पूर्णिमा जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाने का एक अनोखा अवसर है। नियमों का पालन कर और सात्विकता अपनाकर आप श्रीहरि और महालक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

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