धर्म डेस्क। जीवन में सफलता और सुख-शांति सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और संस्कारों से भी तय होती है। महान अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ Chanakya ने अपनी नीतियों में ऐसे कई नियम बताए हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण बात है, कुछ चीजों और व्यक्तियों को पैर से स्पर्श करना अशुभ माना गया है।
चाणक्य के अनुसार, हमारे यहाँ पैर का संबंध सम्मान और अपमान दोनों से जुड़ा है। जहां बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया जाता है, वहीं कुछ पवित्र तत्वों को पैर लगाना दुर्भाग्य और नकारात्मकता को आमंत्रित करता है।
किन चीजों को पैर लगाना माना गया है अशुभ?
1. अग्नि (आग)
हिंदू धर्म में अग्नि को देवता का रूप माना गया है। चाहे घर का चूल्हा हो या पूजा का दीपक—अग्नि को पैर से छूना या उसके ऊपर से गुजरना अपमानजनक माना जाता है। ऐसा करना आध्यात्मिक दृष्टि से भी अशुभ माना जाता है।
2. गुरु और ब्राह्मण
जो हमें ज्ञान देते हैं, उन्हें ईश्वर के समान स्थान दिया गया है। गुरु या विद्वान ब्राह्मण को पैर लगाना ज्ञान और सम्मान दोनों का अपमान है। यदि गलती से ऐसा हो जाए, तो तुरंत क्षमा मांगना उचित माना गया है।
3. गौ माता (गाय)
भारतीय परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है। इसे पैर से छूना या लात मारना जीवन में आर्थिक और मानसिक कष्टों का कारण माना जाता है।
4. कुंवारी कन्या और छोटे बच्चे
कन्याओं को देवी का स्वरूप और बच्चों को निष्पाप माना जाता है। इन्हें पैर लगाना लक्ष्मी का अपमान माना जाता है। इनके प्रति हमेशा स्नेह और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
5. बड़े-बुजुर्ग
संस्कारों में बड़ों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्हें पैर लगाना या अपमानित करना घर की सुख-शांति को प्रभावित कर सकता है। चाणक्य के अनुसार, जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं होता, वहां समृद्धि नहीं टिकती।
शास्त्रों में भी है उल्लेख
चाणक्य नीति में इस विषय को स्पष्ट रूप से बताया गया है:
“अग्निं गुरुं ब्राह्मणं च गां कुमारीं च वृद्धकम्।
शिशुं च नैव स्प्रष्टव्यं पादाभ्यां कथंचन ॥”
अर्थात- अग्नि, गुरु, ब्राह्मण, गाय, कुमारी कन्या, वृद्ध और शिशु को कभी भी पैर से स्पर्श नहीं करना चाहिए।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।







