धर्म डेस्क। हर विद्यार्थी का सपना होता है कि वह अपनी पढ़ाई में अव्वल आए और जीवन में एक ऊंचा मुकाम हासिल करे। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए केवल किताबों को रटना काफी नहीं है, बल्कि जीवन में सही आचरण और अनुशासन अपनाना भी बेहद जरूरी है। महान अर्थशास्त्री और मार्गदर्शक आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में विद्यार्थियों के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण सूत्र बताए हैं। चलिए जानते हैं इस बारे में।
1. क्या है शिक्षा का वास्तविक अर्थ?
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
अर्थ: विद्या सबसे पहले मनुष्य को विनम्रता देती है। जिसके भीतर विनम्रता होती है, उसके पास योग्यता अपने आप आ जाती है। योग्य व्यक्ति ही सही तरीके से धन कमा पाता है और उस धन से समाज कल्याण के काम कर पाता है। इससे सीख मिलती है कि अगर ज्ञान हासिल करने के बाद आपके भीतर घमंड आ रहा है, तो समझ लीजिए कि आप सही दिशा में नहीं जा रहे।
2. विद्या ही सबसे बड़ा सौंदर्य है
रूपयौवनसंपन्ना विशाल कुलसम्भवाः।
विद्याहीना न शोभन्ते निर्गन्धा इव किंशुकाः॥
अर्थ: चाणक्य नीति के इस श्लोक में कहा गया है कि पलाश (किंशुक) का फूल दिखने में बेहद खूबसूरत और चटक लाल रंग का होता है, लेकिन उसमें कोई सुगंध नहीं होती। ठीक उसी तरह, यदि कोई व्यक्ति बहुत सुंदर है, युवा है और किसी बेहद अमीर या ऊंचे खानदान में जन्मा है, लेकिन उसके पास ज्ञान या विद्या नहीं है, तो समाज में उसका कोई वास्तविक सम्मान नहीं होता।
3. ज्ञान की सर्वत्र पूजा होती है
विद्वान् प्रशस्यते लोके विद्वान् गच्छति गौरवम्।
विद्या लभते सर्वं विद्या सर्वत्र पूज्यते॥
अर्थ: एक राजा का सम्मान केवल उसके राज्य तक सीमित होता है, लेकिन एक विद्वान व्यक्ति की प्रशंसा पूरी दुनिया में होती है। विद्या के बल पर जीवन में सब कुछ हासिल किया जा सकता है। इसलिए बुद्धिमान लोग हमेशा ज्ञान का संचय करते हैं।
4. एक आदर्श विद्यार्थी के 5 लक्षण
काक चेष्टा बको ध्यानं श्वान निद्रा तथैव च।
अल्पहारी गृहत्यागी विद्यार्थी पंच लक्षणम्॥
आचार्य चाणक्य ने विद्यार्थी जीवन को सफल बनाने के लिए पांच ऐसे नियम बताए हैं, जिन्हें हर छात्र को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए…
- कौवे जैसी उत्सुकता (काक चेष्टा): जैसे कौवा अपने लक्ष्य को पाने के लिए लगातार कोशिश करता है, वैसे ही एक स्टूडेंट के भीतर कुछ भी नया सीखने की ललक और निरंतर प्रयास करने की आदत होनी चाहिए।
- बगुले जैसी एकाग्रता (बको ध्यानं): पढ़ाई करते समय आपका ध्यान बगुले की तरह होना चाहिए, जो पानी में बिल्कुल शांत रहकर सिर्फ अपनी मछली (लक्ष्य) पर नजर रखता है।
- कुत्ते जैसी सतर्कता (श्वान निद्रा): विद्यार्थी की नींद बहुत गहरी या आलस से भरी नहीं होनी चाहिए। कुत्ते की तरह जरा-सी आहट होते ही जाग जाने वाली सतर्कता आपके भीतर होनी चाहिए ताकि समय व्यर्थ न हो।
- संतुलित भोजन (अल्पहारी): ज्यादा खाने से शरीर में आलस और सुस्ती आती है, जिससे पढ़ाई में मन नहीं लगता। इसलिए छात्रों को हमेशा आवश्यकता के अनुसार संतुलित भोजन ही करना चाहिए।
- मोह-माया से दूरी (गृहत्यागी): यहां गृहत्यागी का अर्थ घर छोड़ना नहीं, बल्कि पढ़ाई के दौरान सुख-सुविधाओं, आरामपसंद जिंदगी और घर की मोह-माया से दूर रहकर अपने कर्तव्य पर ध्यान केंद्रित करना है।
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