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Holika Dahan 2026: भद्रा के मुख में दहन क्यों माना जाता है विनाशकारी? जानें क्या है इसका रहस्य

Holika Dahan 2026: भद्रा के मुख में दहन क्यों माना जाता है विनाशकारी? जानें क्या है इसका रहस्य

धर्म डेस्क। रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होलिका दहन के साथ होती है, लेकिन इस वर्ष 2026 में होलिका दहन को लेकर ज्योतिषियों ने विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार, भद्रा मुख के दौरान अग्नि प्रज्वलित करना न केवल अशुभ है, बल्कि इसे विनाशकारी परिणामों का कारक भी माना गया है।

भद्रा मुख और पूंछ – क्या है इसके पीछे का विज्ञान?

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को एक जीवित स्वरूप माना गया है। जब भद्रा काल प्रारंभ होता है, तो गणना के आधार पर इसे शरीर के अंगों में विभाजित किया जाता है।

भद्रा मुख – भद्रा के शुरुआती हिस्से को ‘मुख’ कहा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, मुख में अग्नि का वास होता है। इस समय किया गया कोई भी शुभ कार्य या दहन, समाज और परिवार में दुख, अशांति और कलह का कारण बन सकता है।

भद्रा पूंछ – भद्रा के अंतिम भाग को ‘पूंछ’ कहा जाता है। मुख की तुलना में यह हिस्सा कम हानिकारक होता है। आपातकालीन स्थितियों में, यदि पूर्णिमा तिथि समाप्त हो रही हो, तो विद्वान ‘भद्रा पूंछ’ के समय दहन की अनुमति देते हैं।

क्यों वर्जित है भद्रा मुख में पूजन?

विशेषज्ञों का मानना है कि भद्रा मुख का प्रभाव अत्यंत उग्र होता है। इस दौरान किया गया पूजन घर की बरकत को रोक सकता है और मानसिक तनाव में वृद्धि कर सकता है। शास्त्रों के अनुसार, होलिका दहन के लिए सबसे आदर्श समय ‘भद्रा रहित प्रदोष काल’ होता है।

‘भद्रा काल में नकारात्मक ऊर्जा का स्तर ऊंचा होता है। नियमों का पालन न करने पर जीवन के अनुशासन और सुख-समृद्धि पर विपरीत असर पड़ने की आशंका रहती है।’ – ज्योतिषीय मत

वर्ष 2026 की स्थिति

राहत की बात यह है कि 3 मार्च 2026 को शाम के समय भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। गणना के अनुसार –

भद्रा प्रारंभ – 4 मार्च की सुबह 01:25 बजे से।

शुभ मुहूर्त – 3 मार्च की शाम प्रदोष काल में बिना किसी बाधा के पूजा और दहन संपन्न किया जा सकेगा।

अनिष्ट से बचने के उपाय

यदि कभी ऐसी स्थिति बने कि भद्रा के कारण सही समय न मिल रहा हो, तो विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं-

मंत्र जाप – भद्रा काल में विवादों से बचें और केवल सात्विक मंत्रों का उच्चारण करें।

ध्यान (Meditation) – अपनी ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखने के लिए ध्यान का सहारा लें।

विद्वानों का परामर्श – भद्रा पूंछ का सटीक समय निकालने के लिए सदैव पंचांग या ज्योतिषी की मदद लें।

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