इस महीने के प्रत्येक मंगलवार को ‘बुढ़वा मंगल’ या ‘बड़ा मंगल’ के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी माह के पहले मंगलवार को भगवान श्रीराम क …और पढ़ें
Publish Date: Thu, 05 Mar 2026 07:00:49 PM (IST)Updated Date: Thu, 05 Mar 2026 07:00:49 PM (IST)

HighLights
- सर्वार्थ सिद्धि, रवि और शिव-सिद्ध योग में गूंजेगी शहनाई
- हस्त, चित्रा, स्वाति और अनुराधा नक्षत्रों का बन रहा शुभ योग
- ज्येष्ठ माह और बुढ़वा मंगल के बीच विवाह कार्यों की मचेगी धूम
धर्म डेस्क। सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस महीने के प्रत्येक मंगलवार को ‘बुढ़वा मंगल’ या ‘बड़ा मंगल’ के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी माह के पहले मंगलवार को भगवान श्रीराम की भेंट हनुमान जी से हुई थी। धार्मिक दृष्टि से शुभ होने के साथ-साथ ज्योतिषीय गणना के अनुसार विवाह कार्यों के लिए भी ज्येष्ठ यानी जून का महीना अत्यंत उत्तम माना जाता है।
ज्येष्ठ माह में विवाह की परंपरा
ज्योतिषियों के अनुसार, जून महीने में विवाह के कई श्रेष्ठ मुहूर्त बन रहे हैं। हालांकि, सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार कई राज्यों में ज्येष्ठ के महीने में परिवार की बड़ी या प्रथम संतान का विवाह करने से परहेज किया जाता है। यदि आप जून 2026 में परिणय सूत्र में बंधने की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित शुभ तिथियों और नक्षत्रों का चयन कर सकते हैं।
जून 2026 विवाह मुहूर्त की सूची
जून के उत्तरार्ध में लगातार कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है…
- 21 जून: ज्येष्ठ शुक्ल सप्तमी तिथि। इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अत्यंत शुभ संयोग है।
- 22 जून: ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी व नवमी तिथि। हस्त नक्षत्र के साथ रवि योग का निर्माण हो रहा है।
- 23 जून: ज्येष्ठ शुक्ल नवमी तिथि। इस दिन हस्त और चित्रा नक्षत्र के साथ परिघ योग रहेगा।
- 24 जून: ज्येष्ठ शुक्ल दशमी व एकादशी तिथि। चित्रा और स्वाति नक्षत्र के साथ रवि योग का मेल होगा।
- 25 जून: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि। स्वाति और विशाखा नक्षत्र के साथ शिव-सिद्ध योग का संयोग है।
- 26 जून: ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी व त्रयोदशी तिथि। विशाखा और अनुराधा नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।
- 27 जून: ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि। अनुराधा और ज्येष्ठा नक्षत्र के साथ रवि योग का प्रभाव रहेगा।
- 29 जून: ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तिथि। इस दिन मूल नक्षत्र और भद्रावास योग का विशिष्ट संयोग बन रहा है।
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