धर्म डेस्क। सनातन धर्म में काल भैरव की उपासना का विशेष महत्व है। इस वर्ष 10 जनवरी 2026, शनिवार को माघ माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी। यह दिन भगवान शिव के रौद्र अवतार, काल भैरव को समर्पित है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार के दिन पड़ने वाली इस कालाष्टमी का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि शनिवार और काल भैरव दोनों का संबंध न्याय और अनुशासन से माना जाता है।
संकट निवारण के लिए ‘महाकाल’ की पूजा
ज्योतिषविदों के अनुसार, कालाष्टमी के दिन व्रत और पूजन करने से न केवल भय से मुक्ति मिलती है, बल्कि कुंडली में मौजूद राहु-केतु के दोष भी शांत होते हैं।
भगवान काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ भी कहा जाता है, जिनकी अनुमति के बिना कोई भी कार्य सिद्ध नहीं माना जाता। विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और अदालती मामलों में सफलता के लिए इस दिन की पूजा अचूक मानी गई है।
कालाष्टमी का महत्व
धार्मिक मत है कि जो साधक अष्टमी तिथि पर पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखता है, उसके जीवन से दरिद्रता और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। काल भैरव देव की कृपा से साधक के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के काल (मृत्यु भय), कष्ट और मानसिक संताप दूर हो जाते हैं।
इन ‘गुप्त मंत्रों’ के जाप से मिलेगी सफलता
कालाष्टमी के दिन पूजा के समय निम्नलिखित मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है-
शत्रु बाधा निवारण हेतु – ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरू कुरू बटुकाय ह्रीं नमः स्वाहा।।
भय और संकट मुक्ति हेतु – ॐ कालभैरवाय नम:।।
कार्य सिद्धि के लिए – ॐ ह्लीं बीं ह्लीं श्रीं कलि कपालाय नम:।।
पूजा की विधि और सावधानी
शुद्धिकरण – शनिवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें।
दीप दान – काल भैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इन्हें काले तिल और उड़द की दाल का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
सावधानी – चूंकि काल भैरव तंत्र-मंत्र के अधिपति हैं, इसलिए इनकी पूजा हमेशा सात्विक भाव से और किसी के अहित की भावना के बिना करनी चाहिए।
10 जनवरी का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, माघ मास की इस कालाष्टमी पर शनिवार का संयोग होने से शनि दोष से पीड़ित जातकों को भी मंदिर में जाकर भैरव चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे अटके हुए कार्यों में गति आती है और शत्रुओं का प्रभाव कम होता है।







