Mahashivratri 2026 Date: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का सर्वोच्च शिखर माना जाता है। साल 2026 में यह पर्व काफी महत्वप …और पढ़ें
Publish Date: Sat, 24 Jan 2026 05:03:51 PM (IST)Updated Date: Sat, 24 Jan 2026 05:05:54 PM (IST)
HighLights
- महाशिवरात्रि का दिन बेहद पावन माना जाता है
- इस दिन कई दुर्लभ ग्रहों का संयोग बन रहा है
- इस दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक चेतना और भक्ति का सर्वोच्च शिखर माना जाता है। यह पावन दिन देवों के देव महादेव और माता आदिशक्ति के विवाह व उनके पवित्र मिलन का प्रतीक है। साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि इस दिन आकाश मंडल में कई दुर्लभ ग्रहों का संयोग बन रहा है।
महाशिवरात्रि की शुभ तिथि और मुहूर्त (Mahashivratri 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 05:34 बजे होगा और समापन 16 फरवरी को शाम 06:04 बजे होगा। चूंकि महाशिवरात्रि की पूजा निशिता काल (मध्यरात्रि) में की जाती है, इसलिए मुख्य व्रत और उत्सव 15 फरवरी को ही मनाया जाएगा।
दुर्लभ योगों का संयोग
इस साल महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो किसी भी कार्य की सफलता के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त और भद्रावास योग का भी अद्भुत संगम होगा। इन शुभ घड़ियों में की गई पूजा का फल अनंत गुना बढ़ जाता है और साधक को शिव-शक्ति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
महाशिवरात्रि की पूजा विधि और महत्व
महाशिवरात्रि पर महादेव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल) से अभिषेक करना चाहिए। पूजन के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए बेलपत्र, धतूरा और मदार के पुष्प अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है।
यदि संभव हो, तो इस दिन रुद्राभिषेक कराना चाहिए, जिससे कुंडली के दोष और ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं। यह रात्रि जागरण और ध्यान के लिए भी जानी जाती है। मान्यता है कि इस रात जागकर महादेव की आराधना करने से मनुष्य की जन्म-जन्मांतर की बाधाएं दूर होती हैं और उसे सुख, समृद्धि व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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