Mauni Amavasya 2026: मौन धारण करने से न केवल मानसिक भटकाव कंट्रोल होता है, बल्कि व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के रहस्यों को समझने में सक्षम होता है। शास्त्र …और पढ़ें
Publish Date: Fri, 16 Jan 2026 03:53:50 PM (IST)Updated Date: Fri, 16 Jan 2026 03:53:50 PM (IST)
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में माघ मास की अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) कहा जाता है, आत्म-साधना और मानसिक शांति का महापर्व है। साल 2026 में ग्रहों के विशेष संयोग इस तिथि को आध्यात्मिक रूप से और भी फलदायी बना रहे हैं।
मौन का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व
मत्स्य पुराण के अनुसार, मौन का अर्थ केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि अपनी एनर्जी को भीतर की ओर मोड़ना है। इस दिन चंद्रमा का प्रभाव न्यूनतम होता है, जिससे मन विचलित और चंचल हो सकता है। मौन धारण करने से न केवल मानसिक भटकाव कंट्रोल होता है, बल्कि व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के रहस्यों को समझने में सक्षम होता है। शास्त्रों का मत है कि शोर के बीच किए गए हजारों मंत्रों की तुलना में मन के सन्नाटे में की गई एक प्रार्थना कहीं अधिक शक्तिशाली होती है।
कैसे पाएं महादेव और विष्णु का आशीर्वाद?
- सूर्योदय के समय पवित्र नदियों में मौन रहकर स्नान करना ‘अमृत स्नान’ के समान माना गया है। घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर भी यह पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।
- बिना वाणी का उपयोग किए मन ही मन ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का निरंतर जाप करने से चित्त शुद्ध होता है।
- यह दिन पितरों की तृप्ति के लिए श्रेष्ठ है। स्नान के उपरांत तिल, गुड़ और अन्न का दान मौन रहकर करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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मौन व्रत के लाभ
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, मौन रहने से वाणी की शुद्धि होती है और मनुष्य व्यर्थ के विवादों व क्रोध से बचता है। इससे संकल्प शक्ति सुदृढ़ होती है और कुंडली में चंद्रमा जनित दोषों का शमन होता है, जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह दिन स्वयं को जानने और ईश्वर से मौन संवाद स्थापित करने का सर्वश्रेष्ठ अवसर है।
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