शालिग्राम वैसे तो दिखाई देने में एक काले पत्थर के जैसा होता है लेकिन शास्त्रों में इसे श्री विष्णु के समान ही माना गया है। यह पवित्र प्रतिमा गण्डकी नदी से प्राप्त होती है। वैष्णव संप्रदाय में पूरी भक्ति और विश्वास के साथ रोज शालिग्राम की पूजा की जाती है।
By Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 29 Jun 2025 07:31:54 PM (IST)
Updated Date: Sun, 29 Jun 2025 07:31:54 PM (IST)
HighLights
- भगवान विष्णु का स्वरूप माने जात हैं शालिग्राम
- नियमित रूप से करनी चाहिए शालिग्राम की पूजा
- शालिग्राम पूजा से जीवन में मिलते हैं अच्छे परिणाम
धर्म डेस्क। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, शालिग्राम की पूजा करना विशेष महत्व रखता है. धार्मिक ग्रंथों की मानें तो शालिग्राम भगवान श्री हरि विष्णु का विग्रह स्वरूप है। ये काले रंग के गोल चिकने पत्थर के स्वरूप में पाए जाते हैं। माना जाता है कि देवी तुलसी का विवाह इन्हीं के साथ हुआ था। हिंदू धर्म को मानने वाले बहुत से लोग अपने घरों में पूजा स्थान पर शालिग्राम को स्थापित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जिन लोगों के घरों में शालिग्राम की नियमित रूप से पूजा होती है, वहां पर भगवान विष्णु की सदैव कृपा बनी रहती है।
देवशयनी एकादशी हिंदू धर्म में बहुत शुभ मानी जाती है। यह आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है और इस साल यह (Devshayani Ekadashi 2025) 06 जुलाई को मनाई जाएगी। यह वह दिन है जब भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा के लिए चले जाते हैं। वहीं, इस पावन तिथि पर शालिग्राम जी की पूजा का भी विधान है, आइए इसकी वजह और विधि जानते हैं।
शालिग्राम की पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में शालिग्राम पूजा का विशेष महत्व माना गया है। विष्णु पुराण में कहा गया है कि जिस घर में भगवान शालिग्राम विराजमान होते हैं वह घर किसी तीर्थ से कम नहीं होता। भगवान शालिग्राम को विष्णु जी का का ही स्वरूप माना गया है। ऐसे में घर में उनकी सेवा करने से साधक को जीवन में अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं। इसके साथ ही शालिग्राम जी में सभी देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए इनकी पूजा से सभी देवताओं की कृपा मिलती है।
शालीग्राम की पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें।
- पीले रंग के कपड़े पहनें।
- एक वेदी पर शालिग्राम जी को स्थापित करें।
- पंचामृत से स्नान कराएं।
- इसके बाद उन्हें चंदन, रोली, अक्षत, पीले फूल, तुलसी दल, धूप और दीप अर्पित करें।
- भोग के रूप में पीली मिठाई, फल और पंचामृत चढ़ाएं।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ विष्णवे नमः मंत्र का 108 बार जप करें।।
- अंत में भगवान शालिग्राम की आरती करें।
- पूजा के बाद सभी में प्रसाद बांटें।
- तामसिक चीजों से दूर रहें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







