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Shravan Somvar 2026: क्यों रखा जाता है श्रावण सोमवार का व्रत? जानिए इससे जुड़ी 2 पौराणिक कथाएं

Shravan Somvar 2026: क्यों रखा जाता है श्रावण सोमवार का व्रत? जानिए इससे जुड़ी 2 पौराणिक कथाएं

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari

Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 01:54:27 PM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 01:54:27 PM (IST)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव की आराधना के लिए श्रावण (सावन) मास सबसे पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सावन के सोमवार का व्रत रखने और शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

धार्मिक ग्रंथों में श्रावण सोमवार के महत्व से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं। इनमें दो प्रमुख पौराणिक कथाएं सबसे अधिक प्रचलित हैं।

श्रावण का क्या अर्थ है?

‘श्रावण’ शब्द ‘श्रवण’ से बना है, जिसका अर्थ है सुनना। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में सत्संग, भक्ति और धर्म का श्रवण करने का विशेष महत्व होता है। वेदों को भी ‘श्रुति’ कहा जाता है, क्योंकि ऋषियों ने ईश्वर से प्राप्त ज्ञान को सुनकर लोगों तक पहुंचाया था।

पहली कथा: भगवान परशुराम से जुड़ी है कांवड़ यात्रा की परंपरा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान परशुराम भगवान शिव के परम भक्त थे। वे श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को कांवड़ में गंगाजल भरकर शिव मंदिर जाते थे और शिवलिंग का जलाभिषेक करते थे।

कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने ही सावन में कांवड़ यात्रा और शिव पूजा की इस परंपरा को आगे बढ़ाया। यही कारण है कि आज भी लाखों कांवड़िए सावन के दौरान पवित्र नदियों से जल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में गंगाजल और पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

दूसरी कथा: माता पार्वती के कठोर तप से जुड़ा है सावन का महत्व

दूसरी पौराणिक कथा देवी सती और माता पार्वती से जुड़ी है। कथा के अनुसार, देवी सती ने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में योगाग्नि से देह त्यागने से पहले संकल्प लिया था कि वे हर जन्म में भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में प्राप्त करेंगी। अगले जन्म में उन्होंने हिमालयराज और रानी मैना के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। युवावस्था में उन्होंने सावन के महीने में कठोर तप और निराहार व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न किया।

उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती दोनों को समर्पित माना जाता है और सावन सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

क्यों रखा जाता है सावन सोमवार का व्रत?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और मनचाहा जीवनसाथी मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अविवाहित कन्याएं योग्य वर की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-शांति और पति की लंबी आयु के लिए भगवान शिव की आराधना करती हैं।

नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और प्रचलित कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में मान्यताओं एवं पूजा-विधि में भिन्नता हो सकती है।

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