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दूसरी तिमाही में गोल्ड का बाजार रहा मजबूत क्योंकि कीमतों की रफ्तार हुई धीमी | Parmarth TV

दूसरी तिमाही में गोल्ड का बाजार रहा मजबूत क्योंकि कीमतों की रफ्तार हुई धीमी | Parmarth TV

India 2026- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 2026 की दूसरी तिमाही के लिए गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसके मुताबिक गोल्ड की कुल मांग साल-दर-साल 1,269 टन पर स्थिर बनी हुई है, क्योंकि गोल्ड की कीमतें 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचने के बाद नरम पड़ने लगीं, जिससे पहली छमाही के लिए मांग साल-दर-साल 2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 2,522 टन, यानी 380 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गई।

दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ, बार, और सिक्कों में निवेश कम होकर 262 टन रह गया। यह गोल्ड की कम कीमतों की वजह से इस साल की शुरुआत में देखी गई तेजी के धीमा पड़ने के कारण हुआ। इस कमी का मुख्य कारण दूसरी तिमाही में गोल्ड ईटीएफ से 45 टन का आउटफ्लो था। हालांकि, पहली छमाही में ईटीएफ की मांग थोड़ी पॉजिटिव दर्ज होकर 18 टन रही थी। बार और सिक्कों में निवेश दूसरी तिमाही में साल-दर-साल 3 प्रतिशत की कमी के साथ लगभग स्थिर बना रहा। हालांकि, पहली तिमाही में जबरदस्त प्रदर्शन के चलते पहली छमाही में मांग पिछले साल के इसी समय के मुकाबले 21 प्रतिशत ज्यादा दर्ज हुई थी। दूसरी तरफ, ओटीसी बाजार में मांग को एशियन निवेश से सहारा मिला और यह दूसरी तिमाही में 327 टन तथा पहली छमाही में 571 टन दर्ज हुई।

कई बाजारों में खरीदारी बढ़ने के साथ केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों ने दूसरी तिमाही में 62 प्रतिशत साल-दर-साल की वृद्धि के साथ रिजर्व में कुल 289 टन गोल्ड बढ़ाया। दूसरी तिमाही के मजबूत रहने के बाद भी पहली छमाही की मांग पिछले कुछ सालों में देखी गई बढ़ी हुई मांग के मुकाबले कम रही, जिसका कारण पहली तिमाही का कमजोर प्रदर्शन था।3 वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सेंट्रल बैंक गोल्ड रिजर्व सर्वे के मुताबिक 45 प्रतिशत उत्तरदाता अगले 12 महीनों में अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाना चाहते हैं, जिससे आधिकारिक रिजर्व में गोल्ड का स्थायी महत्व प्रदर्शित होता है। 

दूसरी तिमाही में ज्वेलरी की मांग पर ऊँची कीमतों का दबाव बना रहा। ग्राहकों द्वारा कम गोल्ड खरीदे जाने और हल्के प्रोडक्ट्स की ओर चले जाने के कारण ज्वेलरी की मांग में 17 प्रतिशत साल-दर-साल की कमी आई। इसलिए पहली छमाही का वॉल्यूम कम रहा, लेकिन ज्वेलरी की मांग का मूल्य मजबूत बना रहा, जो पहली छमाही में 22 प्रतिशत की साल-दर-साल बढ़ोत्तरी के साथ 86 बिलियन अमेरिकी डॉलर के ग्लोबल टोटल तक पहुँच गया।

दूसरी तिमाही में गोल्ड की कुल सप्लाई सालाना आधार पर बिना किसी परिवर्तन के 1,269 टन रही, वहीं माईन प्रोडक्शन और रिसायक्लिंग में अंतर दर्ज किया गया। जहाँ कैनेडा और चिली में नए प्रोडक्शन की मदद से माईन सप्लाई साल-दर-साल 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 966 टन पर पहुँची, तो इसी अवधि में ऊँची कीमतों के बावजूद रिसायक्लिंग में 6 प्रतिशत की सालाना कमी दर्ज की गई। 

लुईस स्ट्रीट, सीनियर मार्केट एनालिस्ट, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने कहा, ‘‘साल की शुरुआत में गोल्ड में आई तेजी दूसरी तिमाही में पलट गई। रिकॉर्ड ऊँचाई पर पहुँचने के बाद कीमतों में करेक्शन हुआ। लेकिन बाजार मजबूत बना रहा, जिससे डाईवर्सिफिकेशन और मूल्यवान संपत्ति के रूप में गोल्ड की स्थापित पहचान प्रदर्शित होती है।

कीमतों के साथ गोल्ड ईटीएफ में फ्लो कम हुआ। लेकिन सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार खरीदारी और ओटीसी निवेश में वृद्धि ने गोल्ड की कुल मांग को बढ़ाकर पहली छमाही में 2 प्रतिशत ज्यादा कर दिया। 2026 की दूसरी छमाही में निवेश इस वृद्धि को आगे बढ़ाएगा। लेकिन मिश्रित मांग में अंतर हो सकता है। ओटीसी मांग और एशियन निवेशकों की मांग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, वहीं पश्चिमी गोल्ड ईटीएफ ब्याज वास्तविक रिटर्न, अमेरिका में मोनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों और डॉलर से जुड़े रहेंगे। केंद्रीय बैंक महत्वपूर्ण खरीदार बने रहेंगे, हालांकि उनकी गति पिछले चार सालों में देखी गई तेजी से थोड़ी कम रहेगी। ज्वेलरी के वॉल्यूम पर ऊँची कीमतों का दबाव बना रहेगा, लेकिन ग्राहक ज्वेलरी को बेचने की बजाय उसे अपने पास बनाकर रखेंगे, जबकि रिसायक्लिंग में वृद्धि के संकेत नहीं दिख रहे हैं।’’


गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स दूसरी तिमाही, 2026 रिपोर्ट, जिसमें मेटल्स फोकस द्वारा प्रदान किया गया विस्तृत डेटा शामिल है, यहाँ पर देखें। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल को X, @goldcouncil और LinkedIn पर फौलो करें।

1 गोल्ड की कुल मांग में ज्वेलरी, टेक्नोलॉजी, केंद्रीय बैंक, बार एवं सिक्कों, ईटीएफ और ओवर-द-काउंटर मांग शामिल हैं।

2 मांग के ओटीसी और स्टॉक फ्लो में निवेश की मांग के कम दिखाई देने वाले एलिमेंट्स और डेटा के सांख्यिकीय अवशेष शामिल हैं। ओटीसी मांग प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देती, लेकिन अनुमान लगाने वाले निवेशकों की पोजिशनिंग और व्यक्तिगत स्तर पर दी गई रिपोर्ट्स से अनुमानित मांग का आकलन करने में मदद मिलती है।

3 नए प्राप्त हुए मार्केट डेटा और अतिरिक्त विश्लेषण के आधार पर, मेटल्स फोकस ने 2026 की पहली तिमाही में केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की मांग के अपने अनुमान को संशोधित करके 244 टन से 57 टन कर दिया है। यह 187 टन का अंतर ओवर-द-काउंटर (ओटीसी) और अन्य मांग के रूप में फिर से वर्गीकृत किया गया है।

 

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