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जयपुर। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ा बयान दिया है। उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि जिस चुनाव आयोग की पूरे देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संस्था के रूप में साख और प्रतिष्ठा रही है, आज भाजपा सरकार के कार्यकाल में उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा पर सवाल उठना लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।
जूली ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग की कार्यशैली, मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर देश के सामने सवाल उठा रहे हैं। आज इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के भीतर से ही सामने आई आपत्तियों ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 बार विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज की। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
जूली ने कहा कि अब देश के सामने बड़ा सवाल यह है कि जब चुनाव कराने वाली संवैधानिक संस्था के भीतर ही इस प्रकार की गंभीर आपत्तियां सामने आ रही हैं, तो आने वाले समय में चुनाव किस प्रकार होंगे और उन पर जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।
चुनाव केवल सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि लोकतंत्र में जनता के मत और जनादेश की पवित्रता का सवाल है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर किसी भी प्रकार का संशय लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित करता है।
प्रदेश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई
जूली ने कहा कि राजस्थान के हाल ही में हुए नगरीय निकाय चुनावों में भी कांग्रेस ने सत्ता तंत्र के दुरुपयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के गंभीर आरोप उठाए हैं। जिस प्रकार प्रशासनिक मशीनरी और सत्ता के प्रभाव का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के प्रयास हुए, उससे प्रदेश में लोकतंत्र की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है।
PC: rajasthan.ndtv
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