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कर्मयोगी राजेन्द्र के. गोधा को चतुर्थ पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि – पत्रकारिता के युगपुरुष को भावभीनी याद | Parmarth TV

कर्मयोगी राजेन्द्र के. गोधा को चतुर्थ पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि – पत्रकारिता के युगपुरुष को भावभीनी याद | Parmarth TV

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आज भी उनकी स्मृतियाँ हमारे दिलों में जीवित हैं, और उनका योगदान पत्रकारिता व समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

चार वर्ष पूर्व इसी दिन उन्होंने इस नश्वर संसार को अलविदा कहा था, लेकिन उनकी विचारधारा, सिद्धांत और सेवा भावना आज भी हमारे जीवन का हिस्सा बनी हुई है। स्वर्गीय गोधा जी निष्पक्ष, निर्भीक और निडर पत्रकारिता के प्रतीक थे। उन्होंने अपने लेखों से न सिर्फ समाज को जागरूक किया, बल्कि उन अनदेखे मुद्दों को भी प्रकाश में लाया जो आमतौर पर मुख्यधारा की मीडिया में स्थान नहीं पाते।

प्रिंटिंग मशीन को लॉन्च करते हुए कर्मयोगी राजेन्द्र के. गोधा जी – आधुनिक पत्रकारिता की ओर एक सशक्त कदम।

पत्रकारिता में गढ़े नई परिभाषाएं

गोधा जी की लेखनी में सत्य, साहस और संवेदनशीलता की अद्वितीय त्रिवेणी बहती थी। वे पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का माध्यम मानते थे। उन्होंने मीडिया को एक नैतिक दायित्व के रूप में अपनाया और उसके माध्यम से समाज में न्याय, समानता और सच्चाई की अलख जगाई। उनके लेखों में जो सादगी थी, वही उन्हें जन-जन का प्रिय बनाती थी।

उनका यह स्पष्ट मत था कि पत्रकारिता का कर्तव्य सिर्फ खबर देना नहीं, बल्कि उस खबर के पीछे की सच्चाई और सामाजिक जिम्मेदारी को भी उजागर करना है। उन्होंने अपने अख़बार "समाचार जगत" को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जहाँ हर आवाज को स्थान मिला—चाहे वह कमजोर हो या उपेक्षित।

विदेशी प्रतिनिधियों के साथ स्व. राजेन्द्र के. गोधा – अंतरराष्ट्रीय संवाद और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के साथ चाय पर चर्चा – राजनैतिक सौहार्द और संवाद की झलक।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ मंच साझा करते हुए – सामाजिक और राजनैतिक विचारों का समन्वय।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ मंच पर – पत्रकारिता और प्रशासन के बीच सहयोग की मिसाल।

व्यक्तित्व जिसने सबका दिल जीता

राजेन्द्र के. गोधा न केवल एक महान पत्रकार थे, बल्कि वे सरल स्वभाव, उच्च विचार और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी थे। समाज के प्रति उनका समर्पण, धार्मिक आस्थाओं में विश्वास और सादगीपूर्ण जीवनशैली उन्हें एक सच्चा कर्मयोगी बनाती है। उन्होंने "परहित सरिस धर्म नहीं भाई" को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाकर आत्म कल्याण के साथ-साथ समाज सेवा को भी सर्वोच्च स्थान दिया।

परिवार और सामाजिक पहचान

स्वर्गीय गोधा जी अपने पीछे एक समर्पित और स्नेहमयी परिवार छोड़ गए हैं—पत्नी त्रिशला जी, पुत्र शैलेंद्र और निशांत, पुत्रवधू प्रियंका, पुत्री डॉली, और पौत्र-पौत्रियाँ दिविक, देवांश तथा विया। उनके भाई सतीश चंद्र और तेजप्रकाश, बहन चित्रा, भाभियाँ, बहनोई और भतीजे-भतीजियाँ भी उनके आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।

400 से अधिक सम्मानों से हुआ गौरववर्धन

उनकी समाजसेवा और पत्रकारिता में अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 400 से अधिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया था। यह अपने-आप में उनकी लोकप्रियता, निष्ठा और उत्कृष्ट योगदान का प्रमाण है।

पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत जी के साथ निवास स्थान पर सामाजिक कार्यों को लेकर विचार-विमर्श करते हुए – जनसेवा के प्रति समर्पण की एक प्रेरक झलक।

हमेशा जीवित रहेंगी यादें

गोधा जी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक व्यक्ति अपने विचारों, कर्तव्यों और सेवा के माध्यम से अमर बन सकता है। आज जब हम उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद कर रहे हैं, तो यह केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलने की एक प्रतिज्ञा भी है।

चतुर्थ पुण्यतिथि पर राजेन्द्र के. गोधा जी को शत्-शत् नमन और अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

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