पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि रविवार,छह सितंबर को शाम 7 बजकर 29 मिनिट पर शुरू हुई है। सोमवार,सात सितंबर को शाम पांच बजकर तीन मिनिट पर समाप्त होगी। सूर्…और पढ़ें
Publish Date: Mon, 07 Sep 2026 09:18:57 AM (IST)Updated Date: Mon, 07 Sep 2026 09:22:24 AM (IST)
HighLights
- भगवान विष्णु के साथ देवाधिदेव महादेव की आराधना का भी संयोग।
- ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार होगा और फलाहरी भोग अर्पित किया जायेगा।
- व्रतधारी कथा का श्रवण करने के साथ दान-पुण्य सामर्थ्य अनुसार करेंगे।
धर्म डेस्क। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत सात सितंबर सोमवार को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
सोमवार होने के कारण इस बार अजा एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना के साथ भगवान शिव की उपासना का भी संयोग बन रहा है।
मंदिरों में ठाकुरजी का विशेष श्रृंगार होगा और फलाहरी भोग अर्पित किया जायेगा। व्रतधारी कथा का श्रवण करने के साथ दान-पुण्य सामर्थ्य के अनुसार करेंगे।
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि रविवार,छह सितंबर को शाम 7 बजकर 29 मिनिट पर शुरू हुई है। सोमवार,सात सितंबर को शाम पांच बजकर तीन मिनिट पर समाप्त होगी। सूर्योदय के समय एकादशी तिथि विद्यमान रहने के कारण व्रत सात सितंबर को रखा जाएगा।
हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा की कथा
अजा एकादशी की धार्मिक कथा राजा हरिश्चंद्र से जुड़ी है। कथा के अनुसार महर्षि विश्वामित्र की परीक्षा के दौरान हरिश्चंद्र ने अपने वचन की रक्षा के लिए राज्य तक त्याग दिया। परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्हें पत्नी तारामती और पुत्र रोहिताश्व से भी अलग होना पड़ा और स्वयं काशी के श्मशान घाट पर सेवा करनी पड़ी।
कथा में आगे बताया गया है कि सर्पदंश से रोहिताश्व की मृत्यु हो गई। पुत्र के अंतिम संस्कार के लिए तारामती श्मशान पहुंचीं, लेकिन कर्तव्य से बंधे हरिश्चंद्र ने उनसे अंतिम संस्कार का शुल्क मांगा।
आर्थिक संकट के बावजूद उन्होंने सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।इसी कठिन समय में ऋषि गौतम ने उन्हें अजा एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। हरिश्चंद्र ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया।
धार्मिक कथा के अनुसार व्रत के प्रभाव से उनके जीवन में परिवर्तन आया, रोहिताश्व को जीवन मिला और हरिश्चंद्र को उनका राज्य एवं सम्मान वापस प्राप्त हुआ।







