Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

मां की याद में शुरू की 1,500 किलोमीटर की पैदल यात्रा | Parmarth TV CBSE OSM विवाद पर राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरा, कहा- Gen-Z ही आपका अहंकार तोड़ेगा | Parmarth TV रॉयल एनफील्ड ने अब तक की सबसे बड़ी हिमालयन ओडिसी शुरू की  | Parmarth TV Gold-Silver Prices: चांदी की कीमत में आई भारी गिरावट, सोना भी इतना हो गया है सस्ता | Parmarth TV Iran ने अब गिरा दिया अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन, ये चेतावनी भी दे डाली | Parmarth TV Bikaner: गृहमंत्री अमित शाह ने सीमा चौकियों पर नवनिर्मित महिला बैरकों का किया ई-लोकार्पण, पाक को लेकर बोल दी ये बात | Parmarth TV भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद; निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV CNG: आमजन को फिर से लगा बड़ा झटका, अब इतनी महंगी हुई सीएनजी | Parmarth TV Canada में नवजात बच्चे की मौत के मामले में पंजाबी दंपति गिरफ्तार | Parmarth TV Rahul Gandhi के खिलाफ अब इस मामले में दर्ज हुआ परिवाद | Parmarth TV

आखिर ईद के दिन क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी? जानिए हजरत इब्राहिम के त्याग की पूरी कहानी

आखिर ईद के दिन क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी? जानिए हजरत इब्राहिम के त्याग की पूरी कहानी

धर्म डेस्क। ईद-उल-अजहा, जिसे बकरीद भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है। यह त्योहार त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।

इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने के बाद बकरे या अन्य जानवर की कुर्बानी देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ईद पर कुर्बानी देने की परंपरा क्यों शुरू हुई? इसके पीछे हजरत इब्राहिम की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी जुड़ी हुई है।

क्या है कुर्बानी की परंपरा?

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हजरत इब्राहिम अल्लाह के सबसे नेक बंदों में माने जाते थे। कहा जाता है कि एक दिन अल्लाह ने उनकी परीक्षा लेने का फैसला किया। हजरत इब्राहिम को सपना आया कि वह अपनी सबसे प्यारी चीज अल्लाह की राह में कुर्बान कर दें। हजरत इब्राहिम ने समझ लिया कि अल्लाह उनसे उनके बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी मांग रहे हैं।

अल्लाह के आदेश का पालन करने के लिए उन्होंने अपने बेटे को कुर्बान करने का फैसला किया। जब वह इस्माइल की कुर्बानी देने जा रहे थे, तब अल्लाह ने उनकी आस्था और समर्पण से खुश होकर हजरत इस्माइल की जगह एक जानवर भेज दिया। उसी जानवर की कुर्बानी दी गई और तभी से बकरीद पर कुर्बानी देने की परंपरा शुरू हुई।

कुर्बानी का असली मतलब क्या है?

naidunia_image

कुर्बानी का अर्थ केवल जानवर की बलि देना नहीं है। इसका असली संदेश त्याग, इंसानियत और जरूरतमंदों की मदद करना है। इस्लाम में माना जाता है कि इंसान को अपने लालच, अहंकार और बुरी आदतों की कुर्बानी देनी चाहिए।

तीन हिस्सों में बांटा जाता है मांस

इस्लामी परंपरा और नियमों के अनुसार, कुर्बानी के बाद मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का नियम है। इस पूरी रस्म के पीछे मुख्य उद्देश्य समाज के हर तबके को खुशी में शामिल करना होता है। इन तीन हिस्सों को कुछ इस तरह बांटा जाता है-

पहला हिस्सा – यह भाग स्वयं के परिवार और बच्चों के लिए रखा जाता है।

दूसरा हिस्सा – यह हिस्सा अपने करीबी रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों में बांटने के लिए होता है।

तीसरा हिस्सा – यह सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, जिसे समाज के गरीब, बेसहारा और जरूरतमंद लोगों में बांट दिया जाता है।

किन जानवरों की दी जाती है कुर्बानी?

इस्लामिक नियमों के अनुसार बकरा, भेड़, ऊंट, भैंस या गाय की कुर्बानी दी जा सकती है। जानवर का स्वस्थ और निश्चित उम्र का होना जरूरी माना जाता है।

कब मनाई जाती है बकरीद?

ईद-उल-अजहा इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। यह त्योहार हज यात्रा के समापन के साथ जुड़ा हुआ है।

क्या कहते हैं धार्मिक जानकार?

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, बकरीद केवल एक रस्म नहीं बल्कि इंसान को त्याग और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व है। यह त्योहार सिखाता है कि सच्ची आस्था वही है, जिसमें इंसान दूसरों की भलाई और ईश्वर के आदेश को सबसे ऊपर रखे।

नोट – यह लेख धार्मिक मान्यताओं और उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियों पर आधारित है। अलग-अलग समुदायों और विद्वानों की मान्यताओं में कुछ अंतर हो सकता है।

Trending News