शामगढ़। गणेशोत्सव पर्व के अवसर पर जूनी शामगढ़ पोरवाल मोहल्ले में स्थित अतिप्राचीन चिंताहरण गणेश मंदिर पर सुबह शाम भक्ताें की भीड़ उमड़ रहीं हैं।
प्रतिदिन देर शाम पंडित प्रेमनिर्मल नागर द्वारा काशी की तर्ज पर भगवान श्री गणेशजी की महाआरती अग्नि, वायु, जल, कपड़े, वायु के साथ 21, 31 व 51 धूप बत्तियाें से की जा रहीं है।
इस दौरान हजाराें की संख्या में भक्तजन उपस्थित हो रहे हैं। मंदिर परिसर में पहली बार सात प्रकार से महाआरती का आयोजन पंडित ज्योतिषाचार्य नागर कर रहें है। महाआरती प्रतिदिन 8 से 9 बजे तक हो रही है।
जूनी शामगढ़ पोरवाल मोहल्ले में श्रीराम मंदिर के सामने स्थित चिंताहरण गणेशजी में मान्यता है कि भगवान श्री गणेशजी के दर्शन मात्र से भक्तो के विध्न दूर हो जाते हैं।
मंदिर में विराजित गणेशजी की प्रतिमा का इतिहास करीब 530 साल पुराना बताया जा रहा है। मूर्ति करीब 10 फीट लाल पत्थर को काटकर उकेरी गई है, जो मुख्य आकर्षण का केन्द्र हैं।
बड़ा श्रीराम मंदिर के सामने एक गली के कोने पर छोटे से मंदिर में विराजित चिंताहरण गणेश मंदिर में जो भी भक्त श्रद्धा सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है।
पंडित प्रेमनिर्मल नागर ने बताया कि बुधवार को अभिषेक कर चोला चढ़ाने पर भक्ताें की हर मनोकामना पूरी होती है। प्रतिमाह की पूर्णिमा पर भगवान गणेश को विशेष चोला चढ़ाया जाता है।
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1986 में मंदिर का हुआ था जीर्णोद्धार
मंदिर के पास रहने वाले सेवानिवृत वरिष्ठ शिक्षक रामचन्द्र सेठिया के अनुसार श्री चिंताहरण गणेशजी ने रेलवे चालक तेजसिंह राजपूत को सपने में मंदिर बनाने को कहा था, तेजप्रताप ने सपने की बात अपने स्वजनाें को बताई उसके बाद 1986 में तेजसिंह ने गली के कोने पर विराजित गणेश मंदिर का जीर्णोद्वार करवाकर इसे नया स्वरूप दिया। श्रीराम मंदिर पर इस बारे में पूरा शिलालेख अंकित है। मंदिर पंडित गिरधारीलाल नागर की देखरेख में पंडित परमानंद प्रधान ने प्रारंभ किया। ब्रहम मूहुर्त में इसकी स्थापना करने से इसका महत्व है।






