प्रेमानंद महाराज जी का मुख्य निवास और साधना स्थल ‘श्री हित राधा केली कुंज’ है, जो वृंदावन के प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। …और पढ़ें
Publish Date: Tue, 21 Apr 2026 05:12:38 PM (IST)Updated Date: Tue, 21 Apr 2026 05:12:38 PM (IST)
HighLights
- सुबह 4 बजे से शुरू होती है भक्ति की बयार
- प्रेमानंद महाराज के सत्संग-आरती का समय
- यहां समझें पूरी स्टेप-बाय-स्टेप जानकारी
धर्म डेस्क। वृंदावन की पावन भूमि पर श्रीराधा नाम की गूंज और भक्ति का सैलाब हमेशा उमड़ता रहता है। वर्तमान समय में, महाराज श्री प्रेमानंद जी महाराज अपनी अद्भुत भक्ति, सादगी और श्रीहित हरिवंश महाप्रभु की परंपरा के प्रति समर्पण के कारण लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक बन चुके हैं। यदि आप भी उनके दर्शनों के लिए वृंदावन जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कहां स्थित है महाराज जी का आश्रम?
महाराज जी का मुख्य निवास और साधना स्थल ‘श्री हित राधा केली कुंज’ है, जो वृंदावन के प्रसिद्ध परिक्रमा मार्ग पर स्थित है। यह स्थान पूरे दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और भजनों से सराबोर रहता है।
दर्शन और साधना का समय (शेड्यूल)
महाराज जी की दिनचर्या बहुत ही अनुशासित और आध्यात्मिक गतिविधियों से भरी होती है। दर्शन के इच्छुक श्रद्धालुओं को निम्नलिखित समय सारणी का ध्यान रखना चाहिए:
| समय | गतिविधि |
| 04:10 AM – 05:30 AM | सुबह का सत्संग (महाराज जी के मुखारविंद से अमृत वचन) |
| 05:30 AM – 06:30 AM | मंगला आरती और वन विहार |
| 06:30 AM – 08:15 AM | पाठ (हित चौरासी या राधा सुधानिधि) |
| 08:15 AM – 09:15 AM | श्रृंगार आरती, भजन और नाम संकीर्तन |
| 09:15 AM – 04:00 PM | व्यक्तिगत साधना और आश्रम सेवा का समय |
| 04:00 PM – 06:15 PM | संध्या आरती और वाणी पाठ |
महाराज जी अब पारंपरिक परिक्रमा मार्ग की जगह ‘केलि कुंज’ आश्रम से ‘सौरभि कुंड’ की ओर जाते हुए रास्ते में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके लिए सुबह 6:00 से 7:00 बजे के बीच मार्ग पर उपस्थित होना सबसे अच्छा रहता है।
एकांत चर्चा और टोकन की प्रक्रिया
यदि आप महाराज जी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी शंकाओं का समाधान करना चाहते हैं (एकांत चर्चा), तो इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:
- टोकन वितरण: इसके लिए टोकन लेना अनिवार्य है, जो आमतौर पर सुबह 9:30 बजे बांटे जाते हैं।
- दस्तावेज: टोकन प्राप्त करने के लिए अपना पहचान पत्र (Aadhaar Redacted) साथ रखना आवश्यक होता है।
- सीमित स्लॉट: भीड़ को देखते हुए स्लॉट बहुत सीमित होते हैं, इसलिए टोकन मिलने पर ही अगले दिन के दर्शन सुनिश्चित होते हैं।
- ऑनलाइन बुकिंग: ध्यान रहे कि दर्शन के लिए कोई आधिकारिक ऑनलाइन बुकिंग सेवा उपलब्ध नहीं है। आश्रम पहुंचकर ही भौतिक रूप से टोकन प्राप्त करना होता है।
यह भी पढ़ें- मिट्टी या प्लास्टिक… वास्तु के अनुसार किस गुल्लक में टिकता है पैसा? यहां समझें धन बढ़ाने के नियम
वृंदावन पहुंचने का मार्ग
- रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है। यहां से वृंदावन की दूरी लगभग 10-12 किमी है, जिसे ऑटो या टैक्सी से 30-45 मिनट में तय किया जा सकता है।
- स्थानीय साधन: वृंदावन पहुंचने के बाद आप ई-रिक्शा या शेयर ऑटो के जरिए सीधे परिक्रमा मार्ग स्थित केली कुंज आश्रम पहुंच सकते हैं।







