धर्म डेस्क। चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व पर अक्सर महिलाओं के मन में यह दुविधा होती है कि यदि नौ दिनों के उपवास के बीच पीरियड्स (माहवारी) आ जाएं, तो क्या व्रत खंडित हो जाता है? चूंकि माहवारी एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए शास्त्रों में इसके लिए स्पष्ट मार्गदर्शिका दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भक्ति शरीर से ज्यादा मन का विषय है, इसलिए ऐसी स्थिति में अपराध बोध (Guilt) पालने की आवश्यकता नहीं है।
क्या जारी रख सकते हैं व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आपने नौ दिनों के व्रत का संकल्प लिया है और बीच में पीरियड्स आ जाते हैं, तो आपको अपना संकल्प तोड़ने की जरूरत नहीं है। आप अपना उपवास पहले की तरह ही जारी रख सकती हैं और फलाहार ग्रहण कर सकती हैं। हालांकि, यदि शारीरिक कमजोरी या अत्यधिक दर्द महसूस हो, तो सेहत को प्राथमिकता देना ही उचित है, क्योंकि ईश्वर कष्टकारी भक्ति की अपेक्षा नहीं रखते।
शारीरिक दूरी और ‘मानसिक पूजा’ का महत्व
‘धर्म सिंधु’ और अन्य स्मृति ग्रंथों के अनुसार, माहवारी के दौरान कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए…
स्पर्श वर्जित: इस दौरान मंदिर जाना, मूर्तियों को छूना या पूजा सामग्री का स्पर्श करना वर्जित माना गया है।
मानसिक जप: शास्त्रों में ‘मानसिक पूजा’ को सबसे श्रेष्ठ बताया गया है। आप एक स्थान पर बैठकर मन ही मन मां दुर्गा के मंत्रों का जाप कर सकती हैं।
पाठ श्रवण: स्वयं पुस्तक पढ़ने के बजाय मोबाइल या ऑडियो सिस्टम पर दुर्गा सप्तशती, चालीसा या आरती सुनना उत्तम फलदायी होता है। इसमें कोई दोष नहीं लगता।
घर के सदस्यों का सहयोग और कन्या पूजन
पूजा की निरंतरता बनाए रखने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों की मदद ली जा सकती है…
- दीप और आरती: घर के मंदिर की साफ-सफाई, जोत जलाना और आरती जैसे कार्य पति, बच्चों या परिवार के किसी अन्य सदस्य से करवाएं।
- प्रसाद निर्माण: अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन के लिए बनाया जाने वाला विशेष प्रसाद (हलवा-पूरी) स्वयं न बनाकर किसी और से तैयार करवाएं।
- कन्या पूजन की विधि: आप कन्याओं को दूर से ही हाथ जोड़कर प्रणाम कर सकती हैं। उनके पैर छूने या भोजन परोसने का कार्य परिवार के अन्य सदस्य कर सकते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, शुद्ध मन और सच्ची श्रद्धा से किया गया यह ‘मानसिक अर्पण’ भी पूर्णतः सफल और मां दुर्गा द्वारा स्वीकार्य माना जाता है।
स्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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