धर्म डेस्क। अगर आप Khatu Shyam Temple की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह जान लेना जरूरी है कि सिर्फ मुख्य मंदिर के दर्शन ही यात्रा को पूर्ण नहीं बनाते। कुछ विशेष परंपराएं और स्थान ऐसे हैं, जिनके बिना यह यात्रा अधूरी मानी जाती है।
इन स्थानों के बिना अधूरी मानी जाती है यात्रा
खाटू श्याम जी के दर्शन से पहले Ringas से ‘निशान यात्रा’ शुरू करने की परंपरा है। यह स्थान मंदिर से करीब 17 किलोमीटर दूर है। भक्त यहां से ध्वजा (निशान) लेकर पैदल मंदिर तक पहुंचते हैं और इसे अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
इसके अलावा मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर दूर Shyam Kund स्थित है। मान्यता है कि यहीं Barbarik (खाटू श्याम जी) ने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान किया था। इस कुंड का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है।
दर्शन के लिए सबसे शुभ समय
वैसे तो किसी भी दिन दर्शन किए जा सकते हैं, लेकिन हर माह की एकादशी और द्वादशी तिथि को विशेष फलदायी माना गया है। फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष एकादशी (आमलकी एकादशी) को यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसे Phalgun Mela कहा जाता है। इस दिन दर्शन का विशेष महत्व होता है।
कुछ श्रद्धालु कार्तिक माह की एकादशी को भी बाबा का प्राकट्य दिवस मानते हैं।
बाबा को क्या अर्पित करें?
खाटू श्याम जी को प्रसन्न करने के लिए आप-
गुलाब के फूल
मोरपंख
इत्र
अर्पित कर सकते हैं।
भोग के रूप में गाय के दूध से बनी मिठाई, खीर या चूरमा चढ़ाना शुभ माना जाता है। नारियल भी अर्पित किया जाता है। भोग लगाने के बाद चूरमा का प्रसाद बांटना पुण्यदायी माना गया है।
यात्रा के दौरान रखें ध्यान
मंदिर परिसर में प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करें, ताकि दर्शन में किसी प्रकार की परेशानी न हो और यात्रा सुगम बनी रहे।
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