सावन में भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व है। लेकिन सोमवार, विशेष तिथियों और सूर्यास्त के बाद इसे तोड़ना वर्जित है तथा चढ़ाते समय चिकना भाग …और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Thu, 06 Aug 2026 11:16:47 AM (IST)Updated Date: Thu, 06 Aug 2026 11:16:47 AM (IST)
HighLights
- सावन के महीने में भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है
- सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ना शास्त्रों में वर्जित माना गया है
- बेलपत्र का चिकना हिस्सा नीचे की ओर रखकर चढ़ाया जाता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना चल रहा है और इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना में लीन हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में शिवलिंग पर केवल एक लोटा जल और बेलपत्र चढ़ाने मात्र से ही भोलेनाथ प्रसन्न हो जाते हैं। माना जाता है कि भगवान भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
वहीं, भगवान शिव को बेलपत्र अति प्रिय है। इसलिए उनकी पूजा में इसका विशेष महत्व है। हालांकि, शास्त्रों में बेलपत्र तोड़ने और चढ़ाने को लेकर कुछ कड़े नियम बताए गए हैं। गलत समय या तिथि पर बेलपत्र तोड़ने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता। और तो और अनजाने में पाप या दोष भी लग सकता है। तो…आइए जानते हैं बेलपत्र तोड़ने और शिवलिंग पर अर्पित करने के सही नियम क्या हैं-
इन तिथियों और दिनों में भूलकर भी न तोड़ें बेलपत्र
- शास्त्रों में कुछ विशेष दिनों और तिथियों पर बेलपत्र तोड़ने की सख्त मनाही है। जैसे-
- सोमवार: भगवान शिव की पूजा के लिए सोमवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है, लेकिन इस दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित है। सोमवार की पूजा के लिए एक दिन पहले (रविवार को) ही बेलपत्र तोड़कर रख लेना चाहिए।
- विशेष तिथियां: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि के दिन बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए।
- संक्रांति: संक्रांति के दिन भी बेलपत्र तोड़ना शास्त्रों में वर्जित माना गया है।
- शाम का समय: सूर्यास्त के बाद बेलपत्र कभी नहीं तोड़ने चाहिए। शाम के समय बेल के वृक्ष को छूना भी अनुचित माना जाता है।
बेलपत्र तोड़ते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- प्रणाम करके तोड़ें: बेलपत्र तोड़ने से पहले मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करें और बेल के वृक्ष को प्रणाम करके ही पत्ते तोड़ें।
- टहनी न तोड़ें: बेलपत्र तोड़ते समय कभी भी पेड़ की डाली या टहनी न तोड़ें। हमेशा केवल पत्तों को ही अलग करना चाहिए, वरना दोष लगता है।
- पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं: बेल के पेड़ को काटना या नुकसान पहुंचाना महापाप माना गया है, इससे जीवन में कई परेशानियां आ सकती हैं।
- तीन पत्तियों वाला बेलपत्र: पूजा में हमेशा वही बेलपत्र इस्तेमाल करें जिसमें तीन पत्ते एक साथ जुड़े हों। कटा-फटा, सूखा या चक्र/धारी वाला बेलपत्र शिवलिंग पर न चढ़ाएं।
शिवलिंग पर कैसे अर्पित करें बेलपत्र?
- चिकना भाग नीचे रखें: शिवलिंग पर बेलपत्र हमेशा उल्टा चढ़ाया जाता है। यानी बेलपत्र का चिकना वाला हिस्सा शिवलिंग के स्पर्श में होना चाहिए।
- संख्या का ध्यान: शिवलिंग पर 3, 5, 7, 11 या 21 की संख्या में बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- धोकर पुन: प्रयोग करें: यदि आपके पास ताजे या अधिक बेलपत्र उपलब्ध न हों, तो आप अर्पित किए गए बेलपत्र को ही शुद्ध जल से धोकर बार-बार शिवलिंग पर चढ़ा सकते हैं, क्योंकि बेलपत्र कभी बासी नहीं माना जाता।
नोट- यह सभी नियम धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बताए गए हैं।
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