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भगवान महाकाल की राजसी सवारी आज… ठाठ से निकलेंगे अवंतिकानाथ

भगवान महाकाल की राजसी सवारी आज… ठाठ से निकलेंगे अवंतिकानाथ

By Rajesh Verma

Publish Date: Mon, 18 Aug 2025 03:52:52 PM (IST)

Updated Date: Mon, 18 Aug 2025 03:52:52 PM (IST)

नईदुनिया प्रतिनिधि, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर से श्रावण-भद्रपद मास में सोमवार को भगवान महाकाल की राजसी सवारी निकलेगी। भक्तों को भगवान महाकाल के एक साथ छह रूपों के दर्शन होंगे। महाकालेश्वर मंदिर से परंपरा अनुसार शाम 4 बजे सवारी शुरू होगी। निर्धारित मार्गों से होकर पालकी शिप्रा तट पहुंचेगी। यहां पुजारी भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पूजा अर्चना करेंगे।

सप्तधान मुखारविंद में सवार होकर भक्तों को दर्शन

पूजन पश्चात सवारी पुन: मंदिर के लिए रवाना होगी तथा रात 10 बजे पालकी मंदिर पहुंचेगी। इसके बाद रात 10.30 बजे भगवान महाकाल की शयन आरती की जाएगी। सवारी के तहत अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर मनमहेश, गरुड़ पर शिवतांडव, नंदी पर उमा महेश, डोल रथ पर होलकर तथा सप्तधान मुखारविंद में सवार होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।

क्या कुछ रहेगा खास?

  • राजसी सवारी में 70 से अधिक दल शामिल रहेंगे।
  • सात किलो मीटर लंबे सवारी मार्ग पर ड्रोन से पुष्प वर्षा की जाएगी।
  • करीब 100 स्वागत मंचों से पालकी का स्वागत होगा।
  • सवारी मार्ग पर चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए अत्याधुनिक कैमरे लगाए गए हैं।
  • 1900 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे।
  • दोपहर 12 बजे से सवारी मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।

पुख्ता प्रबंध किए गए

सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया राजसी सवारी में सभा मंडप में भीड़ नियंत्रण के लिए दोपहर 12 बजे से प्रोटोकाल तथा मंदिर के 4 नंबर गेट से शीघ्र दर्शन व्यवस्था को बंद कर दिया जाएगा। सवारी में भीड़ की स्थिति ना हो और भगवान महाकाल की पालकी सतत चलती रहे इसके पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। सवारी में शामिल 70 दलों को दोपहर 12 बजे से लाइन अप कर दोपहर 2 बजे रवाना कर दिया जाएगा। शाम 4 बजे भगवान महाकाल की पालकी व अन्य मुखारविंद नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। भगवान महाकाल की राजसी सवारी के लिए धर्मधानी उज्जैन को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। छत्रीचौक, गोपाल मंदिर, कंठाल, सतीगेट पर आकर्षक विद्युत सज्जा तथा फ्लावर डेकोरेशन किया जा रहा है। राजा के स्वागत में महाकालपुरी की मनमोहक छटा देश विदेश से आने वाले भक्तों का मनमोह लेगी।

यह रहेगा शाही सवारी मार्ग

महाकाल मंदिर से शुरू होकर सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, होते हुए सवारी शाम 5.15 बजे मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पहुंचेगी। यहां पूजा अर्चना के पश्चात सवारी रामानुजकोट, कार्तिक चौक, ढाबारोड, टंकी चौराहा, मिर्जा-नईम-बेग मार्ग, छोटा तेलीवाड़ा, कंठाल चौराहा, सतीगेट, छोटा सराफा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए रात 10 बजे पुन: मंदिर पहुंचेगी।

ऐसा रहेगा सवारी का स्वरूप

सवारी में सबसे आगे भगवान महाकाल का रजत ध्वज रहेगा। इसके बाद पुलिस के घुड़सवार, सशस्त्र बल की टुकड़ी, सलामी गार्ड, स्काउट गाईड, कांग्रेस सेवादल, सेवा समिति बैंड, मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से आए 70 से अधिक भजन मंडल, साधु संत, गणमान्य नागरिक, पुलिस बैंड,नगर सेना के सलामी गार्ड शामिल रहेंगे। इसके बाद पुजारी, पुरोहितगण के साथ भगवान महाकाल की पालकी रहेगी। पश्चात भगवान महाकाल के अन्य मुखारविंद के रथ तथा आखिरी में हाथी पर विराजित भगवान महाकाल मनमहेश रूप में भक्तों को दर्शन देते निकलेंगे। सवारी में छह स्थानीय बैंड भी शामिल रहेंगे, जो भगवान के प्रत्येक रथ के आगे प्रस्तुति देते चलेंगे।

यह जनजातीय दल होंगे शामिल

राजसी सवारी में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए जनजातीय कलकार प्रस्तुति देते चलेंगे। इनमें धुलिया जनजाती का गुदुमबाजा नृत्य, आदिवासी ढेमसा नृत्य, आदिवासी डंडा लोकनृत्य तथा बैगा जनजातीय नृत्य प्रमुख हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे पालकी का पूजन

सिंधिया राजवंश की परंपरा अनुसार श्रावण-भाद्रपद मास की राजसी सवारी पर श्री द्वारकाधीश गोपाल मंदिर से सिंधिया राजवंश के सदस्य भगवान महाकाल की पालकी का पूजन करते हैं। सोमवार को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रात करीब 9 बजे गोपाल मंदिर पर भगवान महाकाल की पालकी का पूजन करेंगे। सिंधिया समर्थक राजेंद्र भारती ने बताया सिंधिया रात 8.20 बजे गोपाल मंदिर पहुंचेंगे। पालकी पूजन के बाद वें कुछ दूर सवारी में पैदल भी चलेंगे।

दशहरे पर निकलेगी अगली सवारी

सोमवार को निकलने वाली सावन-भादौ मास की राजसी सवारी के बाद भगवान महाकाल की अगली सवारी 2 अक्टूबर को विजय दशमी के दिन निकलेगी। अवंतिकानाथ चांदी की पालकी में मनमहेश रूप में सवार होकर शमी वृक्ष का पूजन करने दशहरा मैदान जाएंगे। साल में यह एक अवसर होता है जब भगवान महाकाल की सवारी नए शहर फ्रीगंज आती है।

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