मरने वाले का कौन सा सामान इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?
हिंदू धर्म और गरुड़ पुराण के अनुसार मरने वाले का कुछ सामान ज़िंदा लोगों को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन सामानों में मरने वाले की एनर्जी और लगाव होता है।
कपड़े: गरुड़ पुराण के अनुसार, मरने वाले के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इससे पितृ दोष लग सकता है। ये सामान ज़रूरतमंदों को दान कर देना चाहिए।
घड़ी: गरुड़ पुराण के अनुसार, मरे हुए व्यक्ति की घड़ी का इस्तेमाल करना मना माना जाता है, क्योंकि इससे नेगेटिव एनर्जी और पितृ दोष का खतरा रहता है।
गहने: मरे हुए व्यक्ति की ज्वेलरी को सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस्तेमाल करने से पहले उसे शुद्ध या फिर से पिघला लेना चाहिए।
चप्पल या बूट: मरे हुए व्यक्ति के जूते या चप्पल घर में नहीं रखने चाहिए। इससे नेगेटिविटी और वास्तु दोष बढ़ता है।
बिस्तर और गद्दा: मरे हुए व्यक्ति के इस्तेमाल किए गए बिस्तर या तकिए का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए; उन्हें हटा देना चाहिए।
निजी सामान: कंघी, रेज़र, चश्मा या शेविंग किट जैसी चीज़ों को तुरंत दान कर देना चाहिए या घर से हटा देना चाहिए।
गरुड़ पुराण की चेतावनी… पत्नी के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुरुषों को यमलोक में मिलती है ये सजा
महिलाओं को श्मशान घाट जाने से क्यों रोका जाता है? गरुड़ पुराण में बताए गए हैं ये कारण
मरे हुए व्यक्ति के सामान का क्या करना चाहिए?
कपड़े/बिस्तर – मरे हुए व्यक्ति के साफ कपड़े और बिस्तर किसी ज़रूरतमंद या गरीब व्यक्ति को दान करना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे आत्मा को शांति मिलती है। अगर दान करना मुमकिन न हो, तो उन कपड़ों को किसी पवित्र नदी में विसर्जित किया जा सकता है।
ज्वेलरी – मरे हुए व्यक्ति की ज्वेलरी सीधे इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। उन्हें या तो किसी मंदिर में दान कर देना चाहिए या पिघलाकर नई ज्वेलरी बना लेनी चाहिए।
घड़ियां या चश्मा – मेटल से बनी घड़ियां और पर्सनल चीज़ें एनर्जी जमा करती हैं। इन चीज़ों से भी बचना चाहिए।
पर्सनल चीज़ें – कंघी, शेविंग किट, चश्मा या मोबाइल फ़ोन जैसी बहुत ज़्यादा पर्सनल चीज़ें इस्तेमाल नहीं करनी चाहिए। उन्हें या तो दे देना चाहिए, दान कर देना चाहिए या नष्ट कर देना चाहिए।







