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लंका में बिना अन्न-जल के कैसे जीवित रहीं माता सीता? रावण भी रह गया था हैरान

लंका में बिना अन्न-जल के कैसे जीवित रहीं माता सीता? रावण भी रह गया था हैरान

रामायण के अनुसार, जब रावण ने माता सीता का अपहरण कर उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बनाया, तब उन्होंने लंका का अन्न-जल ग्रहण करने से साफ इनकार कर दिया था। …और पढ़ें

Publish Date: Wed, 13 May 2026 02:35:27 PM (IST)Updated Date: Wed, 13 May 2026 02:35:27 PM (IST)

रावण की कैद में ऐसे सुरक्षित रहे माता सीता के प्राण। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)

HighLights

  1. अशोक वाटिका में मां सीता को नहीं लगी भूख-प्यास
  2. रावण की कैद में ऐसे सुरक्षित रहे माता के प्राण
  3. जानें देवराज इंद्र और ‘दिव्य खीर’ की यह कथा

धर्म डेस्क। रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, बल्कि धर्म और सत्य की जीवंत गाथा है। इस धार्मिक ग्रंथ का बेहद प्रेरणादायक प्रसंग है माता सीता का रावण के द्वारा अपहरण कर अशोक वाटिका में बिताया गया समय। सोने की लंका और महाशक्तिशाली रावण की कैद में आने के बाद भी माता सीता ने दृढ़ता से उसका विरोध किया।

माता सीता के संकल्प और पतिव्रता धर्म की वजह से ही लंका में रहने के बाद भी उन्होंने वहां का अन्न-जल ग्रहण नहीं किया। अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अशोक वाटिका में इतने लंबे समय तक रहने के बाद माता सीता कैसे जीवित रहीं, तो चलिए रामायण के इस प्रसंग के बारे में आपको बताते हैं।

अशोक वाटिका में माता सीता की बंदी अवस्था

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लंकापति रावण ने जिस जगह पर माता सीता को रखा था, उस जगह को अशोक वाटिका के नाम से जाना जाता था। इससे पहले रावण माता सीता को महल लेकर गया था। वहां माता सीता ने रावण की सभी चीजों को छूने से इनकार कर दिया। इसके बाद रावण ने माता सीता को अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा।

अशोक वाटिका में माता सीता ने अशोक के पेड़ के नीचे लंबा समय बिताया। वह हमेशा भगवान श्रीराम के ध्यान में लीन रहती थीं। रावण ने माता सीता को डराने के लिए अशोक वाटिका के पास क्रूर राक्षसियों का पहरा लगा दिया था।

ब्रह्मा जी की चिंता और देवराज इंद्र का आगमन

अशोक वाटिका में रहकर माता सीता ने अन्न-जल का त्याग किया, तो ऐसे में ब्रह्मा जी बेहद चिंतित हुए। इसलिए उन्होंने स्वर्ग के राजा देवराज इंद्र को अशोक वाटिका भेजा। वहां पर माता सीता को देवराज इंद्र ने अपने बारे में बताया। उन्होंने माता सीता को स्वर्ग से लाई गई एक दिव्य खीर दी।

उन्होंने बताया कि यह खीर एक अमृत समान है। इसको खाने के बाद आपको भूख और प्यास नहीं लगेगी। इसके बाद माता सीता ने खीर को खाया, जिसके बाद उन्हें अशोक वाटिका में कभी भूख और प्यास नहीं लगी।

हनुमान जी और माता सीता की भेंट

इसी वाटिका में अशोक पेड़ के नीचे माता सीता और हनुमान जी की पहली बार मुलाकात हुई। इस दौरान हनुमान जी ने माता सीता को भगवान श्रीराम की अंगूठी दी थी।

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