हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान फूलों का अर्पण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपनी कोमल भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है। फूल दिव्यता …और पढ़ें
Publish Date: Wed, 04 Feb 2026 06:10:24 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Feb 2026 06:10:24 PM (IST)
HighLights
- शिव जी को प्रिय हैं सफेद फूल, केतकी चढ़ाना है वर्जित
- गणेश जी को भाते हैं गुड़हल और गेंदा, पर कभी न चढ़ाएं तुलसी
- लक्ष्मी जी को कमल तो सरस्वती मां को सफेद पुष्प करना चाहिए अर्पण
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान फूलों का अर्पण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति अपनी कोमल भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है। फूल दिव्यता और पवित्रता के प्रतीक माने जाते हैं। शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, हर देवता की अपनी एक विशेष पसंद होती है और गलत फूल चढ़ाने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
किस भगवान को कौन सा फूल है पसंद?
1. भगवान शिव और माता पार्वती
- शिव जी: महादेव को धतूरे के फूल, हरसिंगार, नागकेसर और सफेद रंग के फूल अत्यंत प्रिय हैं।
- वर्जित: शिव जी की पूजा में कभी भी ‘केतकी’ का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए।
- माता पार्वती: मां गौरी को लाल गुलाब या गुड़हल के फूल विशेष रूप से पसंद हैं।
2. भगवान श्री गणेश और विष्णु जी
- गणपति बप्पा: गणेश जी को गुड़हल और गेंदे के फूल प्रिय हैं। उनके साथ ‘दूर्वा’ चढ़ाना अनिवार्य है।
- वर्जित: गणेश जी को भूलकर भी ‘तुलसी’ अर्पित नहीं करनी चाहिए।
- भगवान विष्णु: विष्णु जी को पीले रंग के फूल जैसे कमल, गेंदा और जूही पसंद हैं। उन्हें तुलसी दल चढ़ाने से वे अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

3. माता लक्ष्मी और सरस्वती
- माता लक्ष्मी: धन की देवी को कमल का फूल सबसे अधिक प्रिय है, इसके अलावा लाल गुलाब भी चढ़ाया जा सकता है।
- माता सरस्वती: विद्या की देवी को सफेद या पीले रंग के फूल अर्पित करने चाहिए, जो शांति और ज्ञान के प्रतीक हैं।
फूल चढ़ाने के 3 सुनहरे नियम
शास्त्रों के अनुसार फूलों के अर्पण में इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है…
- समय का चयन: पूजा के लिए फूल हमेशा सुबह के समय ही तोड़ें।
- शुद्धता: कभी भी जमीन पर गिरे हुए, बासी या मुरझाए हुए फूल भगवान को न चढ़ाएं।
- पात्र की पवित्रता: फूलों को प्लास्टिक की थैली के बजाय टोकरी या किसी शुद्ध धातु के बर्तन में रखें।
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