Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही महंगाई की गर्मी जारी है: Jully | Parmarth TV PM Kisan Scheme: एक ही खतौनी में कई भाइयों के नाम होने पर भी सभी को मिलेगा योजना का लाभ, पूरी करनी होगी ये शर्तें | Parmarth TV जल्द ही खत्म होगी US-Iran जंग, इस समझौते पर हैं दोनों देश सहमत! इसका है इंतजार | Parmarth TV अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो पत्नी के साथ पहुंचे आमेर, राजस्थानी अंदाज में किया स्वागत | Parmarth TV सोने और चांदी में लौटी तेजी; कीमतें 5,100 रुपए तक बढ़ीं – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV क्या पेट्रोल-डीजल के बाद बढ़ने वाली है घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत? | Parmarth TV 15 साल बाद मॉन्कटन की संस्था ने खोला अपना निःशुल्क कपड़ों का भंडार | Parmarth TV Maharashtra: स्कॉर्पियो गहरी खाई में गिरी, 8 लोगों की मौत | Parmarth TV Gold-Silver Prices: 3,754 रुपए महंगी हुई चांदी, इतने बढ़ गए है सोने के दाम, आज ये है रेट | Parmarth TV अभिनेता धर्मेंद्र के गांव नसराली का नौजवान कनाडा में बना जज | Parmarth TV

साधुओं की तपस्थली: सन् 1756 में बने जमात मंदिर में आज भी जीवंत है ‘शिष्य परंपरा’ और राजशाही वैभव

साधुओं की तपस्थली: सन् 1756 में बने जमात मंदिर में आज भी जीवंत है ‘शिष्य परंपरा’ और राजशाही वैभव

नईदुनिया न्यूज, थानखम्हरिया। अयोध्या में रामलला के प्राकट्योत्सव को लेकर देशभर के शिवालयों और मंदिरों में उत्साह का माहौल देखा गया। इस दौरान भगवान श्री राम की भक्ति से जोड़ने वाला 270 वर्ष प्राचीन ‘श्री राम मंदिर’ (जमात मंदिर) भी उत्सव के लिए सज-धज कर तैयार दिखा।

सन् 1756 में साधुओं की जमात द्वारा स्थापित यह मंदिर न केवल वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है, बल्कि संतों की साधना और वैष्णव परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। दो एकड़ के प्रांगण में फैले इस मंदिर का वैभव आज भी राजशाही काल की याद दिलाता है।

साधुओं की ‘जमात’ से पड़ा नाम

इस मंदिर का इतिहास अत्यंत रोचक है। गोस्वामी तुलसीदास जी की पंक्तियां ‘मुद मंगलमय संत समाजू’ यहां सटीक बैठती हैं, क्योंकि यहां वर्षभर साधुओं के समूहों (जमात) का आना-जाना लगा रहता है। साधुओं द्वारा ही स्थापना और उनके निरंतर पड़ाव के कारण इसे ‘जमात मंदिर’ कहा जाने लगा। यह निम्बार्क संप्रदाय का एक प्रतिष्ठित और धनाढ्य मंदिर है, जहां ‘महंतायी विरक्त गद्दी’ की परंपरा है।

महंत को ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करना अनिवार्य

यहां के महंत को ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करना अनिवार्य होता है और उत्तराधिकारी का चयन शिष्य परंपरा से किया जाता है। वर्तमान में महंत बसंतबिहारीदास जी गद्दी पर विराजमान हैं, जो इस परंपरा के 11वें महंत हैं। मंदिर परिसर में श्री राम दरबार के साथ-साथ राधाकृष्ण, हनुमान जी और शिव जी के देवालय स्थापित हैं।

वैष्णव परिवार ने 50 एकड़ भूमि दान की थी

इतिहास के पन्नों को पलटें तो करीब 119 साल पहले ग्राम मरका के एक वैष्णव परिवार ने राधाकृष्ण मंदिर के लिए 50 एकड़ भूमि दान की थी। वहीं, संवत 2020 में ग्राम नवागांव कला निवासी मूलीबाई केडिया ने अपने पति की स्मृति में वर्तमान राम मंदिर का निर्माण करवाया और 30 एकड़ भूमि दान में दी।

मंदिर में मौजूद विशाल नौबत, हाथी का हौदा और प्राचीन शस्त्र आज भी इस स्थान की ऐतिहासिकता और राजशाही प्रभाव की गवाही देते हैं।

naidunia_image

शस्त्र प्रदर्शन और रावण वध की विशेष धार्मिक मान्यताएं

जमात मंदिर की धार्मिक मान्यताएं नगर की परंपराओं से गहराई से जुड़ी हैं। विजयादशमी के अवसर पर यहां अखाड़े द्वारा शस्त्र प्रदर्शन किया जाता है। नगर की परंपरा के अनुसार, मंदिर के महंत द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के बाद ही रावण वध की प्रक्रिया संपन्न होती है। इसके पश्चात पूरे नगर में ‘निशान’ की पूजा की जाती है।

सामाजिक और पारिवारिक कार्यों में भी इस निशान को श्रद्धापूर्वक आमंत्रित करने की परंपरा दूर-दूर तक प्रचलित है।

भजन-कीर्तन और उत्सवों की अनवरत धारा

मंदिर में पिछले 42 वर्षों से रात्रि कालीन नित्य भजन का क्रम अनवरत जारी है। यहां रामनवमी, जन्माष्टमी, राधाष्टमी और तुलसी जयंती जैसे पर्व बड़े धूमधाम से मनाये जाते हैं। कार्तिक मास में महीने भर चलने वाली पथवारी पूजा और ब्राह्मणों के विशेष अनुष्ठान यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा को बनाए रखते हैं।

naidunia_image

भगवान राम, लक्ष्मण और सीता जी की मनोहारी प्रतिमाओं के दर्शन के लिए यहां न केवल स्थानीय बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिन्हें यहां पहुंचकर अपार शांति की अनुभूति होती है।

Trending News