सावन 2026 में सूर्य- चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार सावन के दौरान शिव पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य से सकारात्मक ऊर्जा …और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Thu, 30 Jul 2026 01:30:45 PM (IST)Updated Date: Thu, 30 Jul 2026 01:30:45 PM (IST)
HighLights
- इस साल सावन में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग है
- इससे बचाव के लिए शिव आराधना और मंत्र बहुत फलदायी रहेगा
- सावन में शिवलिंग का रुद्राभिषेक- महामृत्युंजय करना अच्छा माना जाता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली. भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र और पावन माना जाने वाला श्रावण (सावन) मास शुरू हो गयैा है। इस बार का सावन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास और दुर्लभ माना जा रहा है। दरअसल, कई दशकों के बाद ऐसा अद्भुत संयोग बन रहा है, जब सावन के पूरे महीने के दौरान सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ने वाले हैं।
सावन में ग्रहण की तिथियां और ज्योतिषीय प्रभाव
अयोध्या के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, इस सावन का पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को अमावस्या के दिन लगेगा, जबकि दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को पूर्णिमा तिथि पर पड़ेगा। हालांकि, ये दोनों ही ग्रहण भारत में दृश्यमान (दिखाई) नहीं देंगे, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इनका सूक्ष्म प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिल सकता है।
पंचाक्षरी और महामृत्युंजय मंत्र से बदल सकती है किस्मत
पंडित कल्कि राम ने बताया कि श्रावण मास भोलेनाथ की उपासना के लिए सबसे उत्तम काल माना जाता है। इस पूरे महीने में श्रद्धालुओं को शिवलिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र और शिव पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का नियमित जाप करना चाहिए। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और कड़े नियमों के साथ की गई शिव भक्ति से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
ग्रहण काल के दौरान मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के उपाय
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल और सावन के दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। इस दौरान किए गए आध्यात्मिक उपाय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति लाते हैं।
- 12 अगस्त (अमावस्या) के उपाय: इस दिन सुबह स्नान के बाद भगवान सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। संध्या काल में घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और तुलसी के पौधे के समीप बैठकर श्रीसूक्त का पाठ करें।







