श्रद्धालु 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की विशेष आराधना करेंगे और परिवार, समाज व विश्व के कल्याण के साथ अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। पर्व के …और पढ़ें
Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 09:31:38 AM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 09:39:48 AM (IST)
HighLights
- भगवान झूलेलाल के प्रति आस्था, संयम और तपस्या का प्रतीक सिंधी समाज का चालीहा महापर्व 16 जुलाई से प्रारंभ होगा
- पर्व को लेकर प्रमुख झूलेलाल मंदिरों और सिंधी बाहुल क्षेत्रों में तैयारियां शुरू हो गई हैं
- श्रद्धालु 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की विशेष आराधना कर परिवार, समाज व विश्व कल्याण की कामना करेंगे
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। भगवान झूलेलाल के प्रति आस्था, संयम और तपस्या का प्रतीक सिंधी समाज का 40 दिवसीय चालीहा महापर्व 16 जुलाई से प्रारंभ होगा। इस विशेष पर्व को लेकर प्रमुख झूलेलाल मंदिरों और सिंधी बाहुल क्षेत्रों में तैयारियां शुरू हो गई हैं।
श्रद्धालु 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की विशेष आराधना करेंगे और परिवार, समाज व विश्व के कल्याण के साथ अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। पर्व के दौरान अखंड ज्योत, बहराणा साहिब की स्थापना, भजन-कीर्तन, छेज नृत्य, प्रसादी वितरण और धार्मिक अनुष्ठान प्रतिदिन होंगे।
नियमित पूजा-पाठ और संयम का संकल्प लेते हैं
भारतीय सिंधु सभा के अध्यक्ष अजय शिवानी और नरेश फुंदवानी ने बताया, पर्व भगवान झूलेलाल के अवतरण की याद में मनाया जाता है। इस दौरान अनेक श्रद्धालु एक समय भोजन, सात्विक जीवन, नियमित पूजा-पाठ और संयम का संकल्प लेकर तपस्या करते हैं। पर्व को लेकर प्रमुख झूलेलाल मंदिरों और सिंधी बाहुल क्षेत्रों में तैयारियाें को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
शहर में चालीहा महोत्सव के मुख्य आयोजन छत्रीबाग स्थित प्राचीन झूलेलाल मंदिर, वीर सावरकर नगर, दिव्य शक्तिपीठ (रेडिसन चौराहा) पर होते हैं। अन्य झूलेलाल मंदिरों में भी विशेष आराधना होगी। यहां प्रतिदिन अखंड ज्योत, बहराणा साहिब, आरती, भजन-संध्या और सामूहिक पूजा के कार्यक्रम होंगे। समाज के विभिन्न संगठन सेवा गतिविधियों, पौधारोपण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियान भी चलाने की तैयारी कर रहे हैं।
बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए निकाला 250 सदस्यों का जत्था
इंदौर। शहर से विभिन्न जत्थे अमरनाथ यात्रा पर रवाना हो रहे है। इस कड़ी में शनि उपासक मंडल का 250 सदस्यी जत्था इंदौर से 29 जून को रवाना हुआ था। शहर से गए सबसे पहले जत्थे ने तीन जुलाई को बालटाल मार्ग से चढाई शुरू की। जत्थे शामिल रानी प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि सुबह पांच बजे से ही यहां मौसम खराब था उसके बावजूद भी सुबह सात बजे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए बालटाल निकले।जत्था वैष्णोदेवी के दर्शन कर चुका है।
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