Support Parmarth TV.  You can send any amount on our UPI Id: 9643218008m@pnb. 

Gold-Silver Prices: 2,418 रुपए महंगी हुई चांदी, सोने के भी बढ़ गए हैं दाम | Parmarth TV सीएम भजनलाल ने PM Modi को दी जन्मदिन की बधाई, कहा- आपके कुशल नेतृत्व में देश विकास, आत्मनिर्भरता और सशक्तीकरण… | Parmarth TV Petrol-Diesel Prices: आज भी नहीं हुआ कीमतों में बदलाव, अब इस बात की है आशंका | Parmarth TV अब 25 हजार तक वेतन वाले कर्मचारियों का भी कटेगा पीएफ, Modi सरकार ने उठा लिया है ये बड़ा कदम | Parmarth TV जयपुर में चार सीटों पर मिली जीत के बाद Dotasra का बड़ा बयान, कहा- मोदी जी राजस्थान के निकाय चुनावों में आपके… | Parmarth TV देश में टर्म प्लान के क्षेत्र में हैं काफी अवसर: अमीश बैंकर – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV शेयर बाजारों में लिवाली के बीच बैंकिंग सेक्टर के दबाव से सेंसेक्स 22 अंक टूटा – Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar | Parmarth TV सऊदी-यमन में छिड़ा युद्ध, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर किए हमले, मक्का में पहली बार जारी हुआ इमरजेंसी अलर्ट | Parmarth TV भारत के प्लांट्स से निकलने वाली सेमीकंडक्टर चिप्स अब दुनिया के बाजारों तक पहुंचने लगी हैं: PM Modi | Parmarth TV Petrol-Diesel पर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला, कर दी है 1 से 5 रुपए तक की कटौती | Parmarth TV

हैदराबाद की अनोखी ‘रेती वाली दरगाह’: जहां चादर चढ़ाकर नहीं, रेत पर हथेलियों के निशान बनाकर मांगी जाती है दुआ

हैदराबाद की अनोखी ‘रेती वाली दरगाह’: जहां चादर चढ़ाकर नहीं, रेत पर हथेलियों के निशान बनाकर मांगी जाती है दुआ

हैदराबाद के पत्थरगट्टी स्थित ‘रेती वाली दरगाह’ देश की सबसे अनोखी सूफी दरगाहों में से एक है। यहां चादर चढ़ाने के बजाय कच्ची रेत पर हथेलियों के निशान बन…और पढ़ें

By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari

Publish Date: Thu, 20 Aug 2026 04:21:54 PM (IST)Updated Date: Thu, 20 Aug 2026 04:21:54 PM (IST)

हैदराबाद स्थित ऐतिहासिक ‘रेती वाली दरगाह’। (फाइल फोटो)

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आमतौर पर देश और दुनिया की सूफी दरगाहों में संगमरमर या पक्के पत्थरों से बनी भव्य मजारें और उन पर सजी रेशमी चादरें देखने को मिलती हैं। हालांकि, तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के ऐतिहासिक पुराने शहर (पत्थरगट्टी इलाके) में स्थित एक दरगाह अपनी अद्भुत सादगी के लिए पूरे देश में अलग पहचान रखती है। हजरत सैयद सादुल्लाह शाह नक्शबंदी (रह.) की इस दरगाह को स्थानीय लोग ‘रेती वाली दरगाह’ के नाम से पुकारते हैं। यहां की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मजारें पक्की नहीं बनी हैं, बल्कि आज भी बारीक और कच्ची रेत के रूप में सुरक्षित हैं।

चादर चढ़ाने पर मनाही, इत्र-फूल से होता है इस्तकबाल

दरगाह की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां पारंपरिक सूती या रेशमी चादर चढ़ाने पर पूरी तरह रोक है। दरगाह पर आने वाले श्रद्धालु (अकीदतमंद) मजार पर चादर के बजाय सिर्फ सुगंधित इत्र और ताजे फूल पेश करते हैं। यहां आने वाले लोग पक्की मजारों को छूने के बजाय कच्ची रेत पर अपनी हथेलियों के निशान बनाकर दुआ मांगते हैं। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही यह अनूठी परंपरा लोगों को गहरा आध्यात्मिक सुकून देती है।

हजरत सैयद सादुल्लाह शाह (रह.) का रूहानी सफर

इतिहास के अनुसार, महान सूफी संत हजरत सैयद सादुल्लाह शाह (रह.) का जन्म 1199 हिजरी में हुआ था। बचपन से ही धर्म और मानवता की सेवा में लीन रहने वाले हजरत सादुल्लाह शाह आध्यात्मिक खोज में दिल्ली पहुंचे। वहां उन्होंने नक्शबंदिया सिलसिले के प्रसिद्ध संत हजरत शाह गुलाम अली देहलवी (रह.) से रूहानी मार्गदर्शन प्राप्त किया।

पवित्र हज यात्रा के बाद वे दक्कन (हैदराबाद) पहुंचे और नक्शबंदिया सिलसिले का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र स्थापित किया। उन्होंने लगातार 25 वर्षों तक समाज सुधार और आपसी भाईचारे का संदेश फैलाया। लगभग 70 वर्ष की आयु में (28 जमादि-उल-अव्वल 1270 हिजरी) उनका विसाल (देहांत) हुआ।

Trending News