Chandra Grahan 2025 India Time: इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को लगने जा रहा है। इसे भारत समेत कई देशों में देखा जा सकेगा। इस वर्ष कुल चार ग्रहण लगेंगे, लेकिन भारतीयों को केवल यही चंद्रग्रहण दिखाई देगा।
Publish Date: Fri, 05 Sep 2025 08:52:54 AM (IST)
Updated Date: Fri, 05 Sep 2025 10:43:15 AM (IST)
HighLights
- चंद्र ग्रहण की तिथि और समय।
- भारत के ये शहर बनेंगे साक्षी।
- धार्मिक मान्यताएं-सूतक काल।
धर्म डेस्क। साल 2025 का आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को लगने जा रहा है। इसे भारत समेत कई देशों में देखा जा सकेगा। इस वर्ष कुल चार ग्रहण लगेंगे, लेकिन भारतीयों को केवल यही चंद्रग्रहण दिखाई देगा। खास बात यह है कि यह भाद्रपद पूर्णिमा पर लगेगा और इसे ब्लड मून (Blood Moon) के नाम से भी जाना जा रहा है।
चंद्र ग्रहण की तिथि और समय (Chandra Grahan 2025 Date & Time in India)
ग्रहण का स्पर्श (आरंभ)- रात्रि 9:57 बजे
ग्रहण का मध्य- रात्रि 11:41 बजे
ग्रहण का मोक्ष (समापन)- रात्रि 1:27 बजे (8 सितंबर)
इस दौरान सूतक काल 9 घंटे पहले यानी दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर 1:27 बजे तक प्रभावी रहेगा।
भारत के ये शहर बनेंगे साक्षी (Chandra Grahan 2025 Visibility in India)
यह चंद्र ग्रहण भारत के ज्यादातर हिस्सों में दिखाई देगा। खासकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पुणे, लखनऊ, हैदराबाद और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में लोग इसे आसानी से देख पाएंगे। मौसम साफ रहने पर इसे नंगी आंखों से देखा जा सकता है, किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी।
धार्मिक मान्यताएं और सूतक काल
- चंद्रग्रहण को धार्मिक दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता।
- सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रहते हैं और पूजा-पाठ निषेध होती है।
- 8 सितंबर की सुबह स्नान-दान के बाद मंदिरों के पट खोले जाएंगे।
इस बार चंद्र ग्रहण पितृपक्ष के पहले दिन यानी भाद्रपद पूर्णिमा पर लग रहा है, इसलिए आचार्यों के अनुसार श्राद्ध कर्म और पितृ तर्पण ग्रहण से पहले ही कर लेना चाहिए।
ज्योतिषीय दृष्टि से असर
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए शुभ तो कुछ के लिए अशुभ फलदायी हो सकता है। ग्रहण के समय किया गया जप-तप और दान कई गुना फल देता है।
सूर्य ग्रहण 2025 का संयोग
इस वर्ष पितृपक्ष का समापन भी खगोलीय दृष्टि से विशेष रहेगा। 21 सितंबर 2025 को महालया अमावस्या पर सूर्यग्रहण लगेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण का यह संयोग दुर्लभ माना जा रहा है।







