धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व है। भगवान शिव के भक्त (कांवड़िए) गंगाजी या अन्य पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने स्थानीय या प्रसिद्ध शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
यदि आप पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो इसके कठिन और सख्त नियमों के बारे में जानना बेहद जरूरी है। कांवड़ यात्रा केवल एक पैदल यात्रा नहीं, बल्कि एक कठोर तपस्या है।
कांवड़ यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण नियम
पहला- कांवड़ का भूमि स्पर्श वर्जित है (सबसे मुख्य नियम)- कांवड़ को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जाता। यदि आपको विश्राम करना है, तो कांवड़ को किसी स्टैंड, पेड़ की शाखा या किसी अन्य साथी के हाथ में देना होता है। यदि कांवड़ गलती से भी जमीन को छू जाए, तो वह अशुद्ध मानी जाती है। ऐसे में आपको दोबारा पवित्र नदी के पास जाकर स्नान करना होता है और फिर से नया जल भरना पड़ता है।
दूसरा- शारीरिक और मानसिक पवित्रता- यात्रा के दौरान स्नान किए बिना कांवड़ को स्पर्श न करें। चमड़े से बनी चीजें जैसे- बेल्ट, पर्स, जूते-चप्पल आदि का इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित होता है। यात्रा के दौरान किसी के लिए भी अपशब्द, गुस्सा या मन में गलत विचार न लाएं।
तीसरा- नशा और मांसाहार पूरी तरह वर्जित- कांवड़ यात्रा के दौरान शराब, सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू और किसी भी प्रकार का नशा पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। वहीं, भोजन पूरी तरह सात्विक (बिना लहसुन और प्याज का) होना चाहिए।
चौथा- सिर के ऊपर से कांवड़ न ले जाएं- कांवड़ को हमेशा अपने कंधों पर ही रखा जाता है। इसे सिर के ऊपर से ले जाना या किसी की पीठ के पीछे से निकालना वर्जित माना जाता है।
पांचवा- कांवड़ की पवित्रता और सजावट- कांवड़ को साफ-सुथरे कपड़े, घंटी, और फूलों से सजाया जाता है। कांवड़ में भरे गंगाजल में कभी भी उंगली या हाथ न डालें।
पहली बार यात्रा करने वालों के लिए जरूरी टिप्स
- सही पहनावा: हल्के और आरामदायक सूती (Cotton) कपड़े पहनें (आमतौर पर भगवा रंग के)।
- पैरों की देखभाल: नंगे पैर चलने की परंपरा है, लेकिन यदि स्वास्थ्य कारणों से संभव न हो तो बेहद हल्के कपड़े/रबर के गद्देदार चप्पल का प्रयोग किया जा सकता है। पैरों में छाले होने पर प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) की किट साथ रखें।







