पितृ पक्ष 7 से 21 सितंबर 2025 तक रहेगा। इस अवधि में पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण का महत्व है। साथ ही पीपल, बरगद और तुलसी के पौधों का रोपण करके पूजा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद मिलता है।
Publish Date: Mon, 01 Sep 2025 11:58:21 AM (IST)
Updated Date: Mon, 01 Sep 2025 11:58:21 AM (IST)
HighLights
- पूर्वजों की आत्मा की शांति हेतु श्राद्ध और तर्पण करें।
- पीपल का पौधा लगाने से पितरों की कृपा मिलती।
- बरगद का पौधा घर में शांति और दोष दूर करता।
धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। हर साल भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलने वाला यह काल पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद पाने के लिए समर्पित होता है। इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 को समाप्त होगा।
पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पितृों को खुश करने की कोशिश करते हैं। इस दौरान श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने के साथ कुछ विशेष उपायों करते हैं। मान्यता है कि इस समय तीन खास पौधे घर में लगाए जाएं, तो पितृ प्रसन्न होकर घर-परिवार पर सुख-समृद्धि की बारिश करते हैं।
पीपल का पौधा
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। पितृ पक्ष में घर या आसपास पीपल का पौधा लगाकर उसकी नियमित पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। यह उपाय पूरे परिवार को आशीर्वाद और सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
बरगद का पौधा

बरगद के पेड़ को अमरता और दीर्घायु का प्रतीक माना गया है। पितृ पक्ष में बरगद का पौधा लगाना अत्यंत शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि इसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास है। इसको घर में लगाने से शांति आती है और पितृ दोष दूर होता है।
तुलसी का पौधा

तुलसी के पौधे को हिंदू धर्म में पवित्रत माना गया है। पितृ पक्ष में घर के भीतर तुलसी का पौधा लगाने से देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। यह आपको पूर्वजों को भी प्रसन्न करता है। इससे मनोकामनाओं की पूर्ति और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।
अस्वीकरण- इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







