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Raksha Bandhan 2025: सावन पूर्णिमा पर क्यों पहना जाता है नया जनेऊ? जानें इसका महत्व

Raksha Bandhan 2025: सावन पूर्णिमा पर क्यों पहना जाता है नया जनेऊ? जानें इसका महत्व

Raksha Bandhan 2025: नौ अगस्त को पूरे देश में रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाया जाएगा। भाई-बहन के इस त्योहार के दिन ब्राह्मण समुदाय के पुरुष अपना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं, जिसका काफी महत्व है। यह व्यक्ति को उसके कर्तव्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक उन्नति की याद दिलाता है। आइए इसका महत्व जानते हैं।

By Mohan Kumar

Publish Date: Fri, 08 Aug 2025 05:51:12 PM (IST)

Updated Date: Fri, 08 Aug 2025 05:51:12 PM (IST)

सावन पूर्णिमा पर क्यों पहना जाता है नया जनेऊ

HighLights

  1. सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है रक्षाबंधन
  2. इस दिन कई ब्राह्मण समुदाय के पुरुष बदलते हैं जनेऊ
  3. नया जनेऊ धारण करना आध्यात्मिक-शारीरिक स्वच्छता का प्रतीक

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। रक्षाबंधन भाई-बहनों के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है और यह केवल राखी बांधने तक सीमित नहीं है। यह त्योहार सावन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसकी वजह से इस दिन को ‘श्रावणी उपाकर्म’ भी कहते हैं। देश के कई इलाकों में इस दिन ब्राह्मण समुदाय के पुरुष अपना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं। यह परंपरा ऋषि-मुनियों के समय से चली आ रही है। आइए इसका महत्व जानते हैं।

क्या है जनेऊ का धार्मिक महत्व?

जनेऊ सूत से बना एक पवित्र धागा होता है, जिसे तीन धागों को मिलाकर बनाया जाता है। ये तीन धागे ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेवों का प्रतीक माने जाते हैं। जनेऊ को मनुष्य जीवन के तीन ऋणों से भी जोड़ा गया है। ये तीन ऋण हैं मातृ-पितृ ऋण, ऋषि, गुरु या आर्चाय ऋण (ज्ञान) हैं। जनेऊ व्यक्ति को उसके कर्तव्यों, संस्कारों और आध्यात्मिक उन्नति की याद दिलाता है।

क्यों पहना जाता है नया जनेऊ?

रक्षाबंधन में पुराने जनेऊ को बदलकर नए और पवित्र जनेऊ धारण करने की वजह शरीर और आत्मा की शुद्धता को बनाए रखना है। यह एक तरह से आध्यात्मिक और शारीरिक स्वच्छता का प्रतीक है। मान्यता है कि इससे शरीर की पवित्रता बनी रहती है। ऐसी भी मान्यता है कि श्रावणी उपाकर्म जाने-अनजाने में किए गए पापों और गलतियों का प्रायश्चित करता है। नई जनेऊ धारण करना एक नई शुरुआत करने का प्रतीक है, जिसमें व्यक्ति अच्छे कर्म करने का संकल्प लेता है। इस दिन घर के सभी पुरुष सदस्य एक साथ आकर पुराने जनेऊ को बदलते हैं। यह धार्मिक अनुष्ठान परिवार के सदस्यों को एक साथ लाता है और उन्हें अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जोड़े रखता है।

अस्वीकरण- इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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