सावन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय महीना है, जो 11 जुलाई से 9 अगस्त 2025 तक रहेगा। भक्त इस दौरान सोमवार व्रत रखते हैं और रुद्राभिषेक करते हैं। शुभ तिथियों पर पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह महीना आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ होता है।
By Anurag Mishra
Publish Date: Fri, 20 Jun 2025 04:28:36 PM (IST)
Updated Date: Fri, 20 Jun 2025 04:28:36 PM (IST)
HighLights
- रुद्राभिषेक में जल, दूध, शहद, बेलपत्र से शिवलिंग का अभिषेक करें।
- पूर्णिमा, प्रदोष और सावन सोमवार सबसे शुभ तिथियां मानी जाती हैं।
- इस महीने भगवान शिव की उपासना से मनोकामनाएं शीघ्र पूरी होती हैं।
धर्म डेस्क, इंदौर। सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इस महीने के हर सोमवार को रुद्राभिषेक करने से उनका विशेष आशीर्वाद मिलता है, जिससे मनचाही मुराद पूरी होती है। यह एक पवित्र महीना है। भगवान शिव के भक्त इस महीने में पड़ने वाले हर सोमवार को उनका व्रत भी रखते हैं।
आपको बता दें कि 11 जुलाई 2025 से सावन का महीना शुरू हो रहा है। यह 9 अगस्त 2025 तक चलेगा। इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि सावन की महीने की कौन सी तिथि बेहद शुभ है। आप कैसे रुद्राभिषेक करें, जिससे आपको भगवान शिव का विशेष प्रेम मिले।
सावन में रुद्राभिषेक की शुभ तिथियां
सावन के महीने में भक्तों को लगता है कि सोमवार ही तिथि है, लेकिन ऐसा नहीं है। सावन के महीने में पड़ने वाले दोनों प्रदोष व्रत, शिवरात्रि, नागपंचमी आदि तिथियां उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। इन तिथियों पर प्रभु को अभिषेक करने से जीवन की हर समस्या खत्म हो जाती है।
- सोमवार- 14 जुलाई 2025 पहला सावन सोमवार
रुद्राभिषेक की विधि
- रुद्राभिषेक के लिए सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल अर्पित करें।
- उसके बाद गंगाजल से शिवलिंग को गंगाजल चढ़ाएं।
- दूध, दही, शक्कर, घी, शहद का पंचामृत बनाएं। उससे अभिषेक करें।
- उसके बाद शुद्ध जल अर्पित कर शिवलिंग को साफ करें।
- शिवलिंग पर पीले चंदन या सफेद चंदन का लेप लगा दें।
- शिव जी को बेलपत्र अर्पित करें। इस दौरान ध्यान दें कि इसकी संख्या 1, 3, 5, 7, 9, 11, 21, 51 या 108 हो।
- बेलपत्र अर्पित करते समय ध्यान दें कि यह खंडित नहीं होना चाहिए।
- भगवान शिव को सफेद फूलों की माला अर्पित करें।
- उन्हें फल, मिठाई का भोग लगा दें।
- अक्षत चढ़ाकर देसी घी का दीपक जला दें।
- इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ‘ऊं नम:शिवाय’ मंत्र का जाप करते रहें। उसके बाद आरती करें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। नईदुनिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। नईदुनिया अंधविश्वास के खिलाफ है।







