Solar Eclipse 2026-12 अगस्त 2026 को लगने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में रात के समय होने के कारण अदृश्य रहेगा, जिससे देश में कोई सूतक काल लागू नहीं हो…और पढ़ें
By Akriti KumariEdited By: Akriti Kumari
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 11:45:56 AM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 12:08:45 PM (IST)
HighLights
- 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा
- भारत में यह रात 9:04 से सुबह 1:27 तक होगा
- यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने वाला है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 12 अगस्त 2026 को इस साल का एक जरूरी एस्ट्रो इवेंट, यानी पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होने जा रहा है। भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात के समय लगेगा। लेकिन, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सूतक काल मान्य नहीं होगा। न ही दैनिक दिनचर्या या पूजा-पाठ पर कोई पाबंदी रहेगी।
ग्रहण का सटीक समय (भारतीय समयानुसार – IST)
यह ग्रहण कुल 4 घंटे 23 मिनट और 40 सेकंड तक चलेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की मुख्य समय-सारणी इस प्रकार है-
- ग्रहण की शुरुआत: 12 अगस्त 2026 की रात 9:04 बजे
- पूर्ण ग्रहण (टोटलिटी) की शुरुआत: रात 10:28 बजे
- परमग्रास (Peak Time): रात 11:16 बजे (जब सूर्य सबसे ज्यादा ढका रहेगा)
- ग्रहण की समाप्ति: 13 अगस्त 2026 की सुबह 1:27 बजे
दुनिया में कहां दिखेगा यह ग्रहण
चूंकि भारत में इस समय रात होगी और आसमान में सूर्य मौजूद नहीं रहेगा। इसलिए यह भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा।
- पूर्ण सूर्य ग्रहण: ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिन के समय पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा।
- आंशिक सूर्य ग्रहण: पूरे यूरोप, कनाडा, पश्चिमी अफ्रीका और अमेरिका के उत्तरी हिस्सों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा।
Sutak Kaal और धार्मिक मान्यताएं
सनातन धर्म के नियमों के अनुसार, जो ग्रहण जिस भू-भाग में दिखाई नहीं देता, वहां उसका ‘सूतक काल’ या कोई धार्मिक दुष्प्रभाव नहीं माना जाता। यह ग्रहण सावन मास की अमावस्या (हरियाली अमावस्या) को लग रहा है। भारत में सूतक लागू न होने के कारण मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे। वहीं, लोग बिना किसी डर के अपनी सामान्य दिनचर्या, भोजन पकाना व ग्रहण करना, सोना और सावन के अनुष्ठान व पूजा-पाठ कर सकते हैं।
ग्रहण में क्या न करें…
- नंगी आंखों से न देखें: जिन देशों में ग्रहण दिखेगा, वहां लोग बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर/ग्रहण चश्मे के सूर्य को न देखें। सामान्य धूप का चश्मा (Sunglasses) आंखों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं होता।
- कैमरे या टेलीस्कोप का सीधा उपयोग न करें: बिना सही फिल्टर के कैमरा, दूरबीन (Telescope) या बाइनोक्युलर से सूर्य की तरफ देखने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
- गर्भवती महिलाएं: भारतीय परंपरा के अनुसार ग्रहण काल में नुकीली चीजें (कैंची, सुई, चाकू) न छूने और बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। हालांकि, भारत में दृश्य न होने से यह नियम बाध्यकारी नहीं है। फिर भी मन की शांति के लिए लोग इसे मान सकते हैं।
- अफवाहों से बचें: यह एक स्वाभाविक खगोलीय घटना है। सोशल मीडिया की अंधविश्वास फैलाने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें।
ग्रहण में क्या करें
- प्रमाणित चश्मों का प्रयोग: ग्रहण देखने के लिए केवल ISO 12312-2 प्रमाणित Eclipse Glasses का ही उपयोग करें।
- ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग देखें: भारत में रात होने के कारण इस नजारे का आनंद लेने के लिए नासा (NASA) या अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों की लाइव ऑनलाइन स्ट्रीमिंग देखें।
- ध्यान और मंत्र जाप: मानसिक शांति के लिए ग्रहण काल (रात 9:04 से सुबह 1:27 बजे) के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का मन में जाप कर सकते हैं।
ज्योतिषीय समीकरण और प्रभाव
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। इस दौरान कर्क राशि में सूर्य के साथ देवगुरु बृहस्पति और बुध ग्रह भी मौजूद रहेंगे। इस त्रिग्रही योग के प्रभाव से वैश्विक स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव (जैसे तापमान में गिरावट) और राजनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।







